Vat Savitri Vrat 2028: हिन्दू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व होता है। यह व्रत हर वर्ष ज्येष्ठ माह के कष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि के दिन रखा जाता है। वट सावित्री का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की और खुशहाल जीवन की कामना के लिए रखती हैं। इस दिन महिलाएं सोलह शृंगार करके बरगद के पेड़ की पूजा करती है। और कच्चे सूत के साथ वट वृक्ष के चारों ओर लपेटते हुए परिक्रमा करती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार वट वृक्ष के नीचे बैठकर ही देवी सावित्री ने अपने पति सत्यवान को दोबारा जीवित कर दिया था। इस व्रत में सभी सुंहागिन महिलाये बरगद के पेड़ और सावित्री-सत्यवान की पूजा करती है।
मान्यता है कि इस व्रत को रखने से भगवान शनि देव की कृपा प्राप्त होती है। इसके अलावा अमावस्या के दिन इस व्रत को रखने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि वट सावित्री के दिन विधिवत पूजा करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति का वरदान प्राप्त होता है। और इस दिन शनि जयंती भी मनाई जाएगी। आइये जानते है साल 2028 में व्रत सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat) कब रखा जाएगा? 23 या 24 मई, जानिए पूजा की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व-
2028 में व्रत सावित्री व्रत कब है: Vat Savitri Vrat 2028 Date And Time New Delhi India
| व्रत त्यौहार | व्रत त्यौहार समय |
|---|---|
| वट सावित्री व्रत | 24 मई 2028, दिन बुधवार |
| अमावस्या तिथि प्रारम्भ | 23 मई 2028, दोपहर 02:09 मिनट पर |
| अमावस्या तिथि समाप्त | 24 मई 2028, दोपहर 01:45 मिनट पर |
पूजा सामग्री
- सावित्री सत्यवान की फ़ोटो या प्रतिमा
- धूप
- दीप
- बांस का पंखा
- लाल कलावा
- शुद्ध देशी घी
- फल-फूल
- रोली- मोली
- सुहाग का सामान
- पूरियां
- चना
- बरगद के फल
- सिंदूर
- जल से भरा एक कलश और रोली
आदि।
वट सावित्री व्रत पूजा विधि
वट सावित्री व्रत के दिन सभी व्रती महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृच होकरं घर के पूजा स्थल पर दीप प्रज्वलित करके वट सावित्री व्रत करने का संकल्प ले। इस दिन महिलाए पूजा के पूरे शृंगार के साथ ही करे। और वट सावित्री पूजा के दौरान महिलाये लाल, गुलाबी रंग के कपड़े पहने। लेकिन इस पूजा के दौरान भूलकर भी काले रंग का कपड़ा ना पहने। इसके बाद पूजा स्थल पर धूप-दीप जलाकर एक बांस की टोकरी में सात तरह के अनाज और दूसरी टोकरी में सावित्री सत्यवान की प्रतिमा रखे।
और वट वृक्ष के पास पूजा के लिए जाए। इसके बाद वट वृक्ष के नीचे सावित्री सत्यवान की प्रतिमा रखे। और सबसे पहले वट वृक्ष पर जल चढ़ा कर कुमकुम, अक्षत, रोली, पूरियां और बरगद का फल वृक्ष को अर्पित करें। इसके बाद सूत के धागे को वट वृक्ष के पांच, सात या बारह चक्कर लगाते हुए बांध ले। और परिक्रमा करते समय हर परिक्रमा पर एक-एक चना वृक्ष में चढ़ाती जाए।
वट सावित्री व्रत उपाय
- वट सावित्री व्रत पर पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए बरगद (वट) के पेड़ की पूजा की जाती है। सबसे अचूक उपाय है पेड़ के चारों ओर कच्चा सूत लपेटकर 108 बार परिक्रमा करना और भीगे हुए चने का भोग लगाना चाहिए।
- वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat) के दिन माता सावित्री को सुहाग का सामान जैसे (सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, साड़ी) आदि अर्पित करें। और पूजा के बाद इसे किसी जरूरतमंद या सुहागिन महिला को दान देंने से आपकी मनोकामना पूरी होगी।
