2027 में उत्पन्ना एकादशी व्रत कब है: Utpanna Ekadashi 2027 Date And Time New Delhi India

Utpanna Ekadashi 2027: हिन्दू धर्म मे एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। मार्गशीर्ष मास को अगहन मास भी कहा जाता है। इस मास में आने वाली एकादशी का विशेष महत्व है। हिंदी पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष मार्गशीर्ष मास के कृष्णपक्ष में आने आने वाली एकादशी तिथि को उतपन्ना एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु जी के साथ माता लक्ष्मी जी की पूजा करने का विधान है। ऐसी मान्यता है की इस दिन एकादशी माता की उतपत्ति भगवान विष्णु के द्वारा हुई थी।

इसलिए आज के दिन ही भगवान विष्णुजी की आराधना से पूर्वजन्म और वर्तमान दोनों जन्मों के पाप कर्म नष्ट हो जाते है। और इस व्रत को करने से एकादशी की पूजा से जातक को सभी सांसारिक दुखों से छुटकारा मिलता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइये जानते है साल 2026 में उत्तपन्ना एकादशी (Utpanna Ekadashi) कब है? 23 या 24 नवम्वर, जानिए सही दिन तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि व्रत पारण और इस दिन किये जाने वाले उपाय

2027 में उत्पन्ना एकादशी व्रत कब है: Utpanna Ekadashi 2027 Date And Time New Delhi India

व्रत त्यौहारव्रत त्यौहार समय
उत्पन्ना एकादशी व्रत24 नवम्बर 2027, दिन बुधवार
एकादशी तिथि प्रारम्भ23 नवम्बर 2027, दोपहर 01:44 मिनट पर
एकादशी तिथि समाप्त24 नवम्बर 2027, दोपहर 12:11 मिनट पर
एकादशी व्रत पारण का समय25 नवम्बर 2027, सुबह 06:51 से 08:58 मिनट तक

उत्पन्ना एकादशी पूजा विधि

उत्तपन्ना एकादशी के दिन व्रती को शुभ मुहूर्त में उठकर दैनिक क्रिया करके स्नान आदि करले इसके बाद साफ कपड़े पहनकर व्रत का संकल्प ले इसके बाद पूजा मंदिर की अच्छे से साफ सपाई आदि करके एक लकड़ी की चौकी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या फ़ोटो स्थापित करे। इसके पंचामृत से भगवान विष्णु जी को स्नान कराएं। इसके बाद भगवान विष्णु जी को अक्षत, धूप, दिप, पैन का पत्ता, रोली , चंदन, फल-फूल, पिला वस्त्र, मिठाई, सुपारी आदि अर्पित करे।

इसके बाद माता लक्ष्मी जी को फल-फूल मिठाई, धूप-दीप, अक्षत, कुमकुम आदि अर्पित करे। इसके बाद भगवान विष्णु मंत्रो को बोलते हुए भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी जी की आरती करें। और उतपन्ना एकादशी व्रत की कथा सुने या फिर पढ़े इसके बाद रात्रि में भजन कीर्तन करते हुए जागरण करे इसके अलावा विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ करे। और अगले दिन यदि द्वादशी तिथि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करके व्रत का पारण करे।

उत्पन्ना एकादशी व्रत के नियम

उतपन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए पूजा पाठ, व्रत कथा का पाठ किया जाता है। इसके अलावा उतपन्ना व्रत के दिन भगवान विष्णु को खुश करने के लिए कुछ उपाय भी किया जाता है जैसे –

  • धार्मिक मान्यता के अनुसार उतपन्ना एकादशी व्रत के दिन भुलकर भी तामसिक चीजो का सेवन नही करना चाहिए। जैसे मास, मछली, अंडा इसके अलावा लहसुन, प्याज, मूली, बैगन और बासी भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। उत्पन्ना एकादशी के दिन “ऊ नमो भगवते वासुदेवाय नमः” मंत्र का जाप करते रहना चाहिए। और भूलकर भी इस दिन चावलों का सेवन भी नही करना चाहिए।
  • उत्तपन्ना एकादशी (Utpanna Ekadashi) के दिन झूठ नही बोलना चाहिए। और नही इस दिन तुलसी का पत्ता तोड़ना चाहिए और नही इस दिन तुलसी को जल अर्पित करना चाहिए। और उत्तपन्ना एकादशी एकादशी के दिन सोना नही चाहिए बल्कि भगवान के नाम का भजन कीर्तन करते रहना चाहिए। और नही इस दिन काले रंग का कपड़ा पहनना चाहिए। और नही इस दिन बाल, नाखून कटवाना चाहिए।
  • धार्मिक मान्यता के अनुसार उत्पन्ना एकादशी के दिन भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करने और तुलसी की 108 दाने वाली माला से 5,7,9,11 बार जाप करने से शुभ फल की प्राप्ति होती होती है।
  • उत्तपन्ना एकादशी व्रत वाले दिन भगवान विष्णु जी की पूजा आराधना करने के बाद किसी भी गरीब व्यक्ति को ऊनि वस्त्र, का दान करने से भगवान विष्णु लोक की प्राप्ति होती है।
  • उतपन्ना एकादशी (Utpanna Ekadashi) व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करने के बाद भगवान विष्णु के सामने शुद्ध देशी घी का दीपक जलाएं। इसके बाद भगवान विष्णु को फूल, धूप, दीप और अक्षत आदि अर्पित करने से जीवन मे सुख सम्पन्नता बढ़ती है।
  • उतपन्ना एकादशी के दिन 5 गुंजाफल भगवान विष्णु के समक्ष रखकर उनकी पूजा करने के बाद उस फल को घर के तिजोरी में रहने से कारोबार में दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की होती है।

2028 में उतपन्ना एकादशी कब है

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