2030 में ऋषि पंचमी कब है: Rishi Panchami 2030 Date And Time New Delhi India

Rishi Panchami 2030: हिन्दू धर्म मे ऋषि पंचमी का विशेष महत्व होता है। हिंदी पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन ऋषि पंचमी का पर्व मनाया जाता है। वैसे तो आमतौर पर यह व्रत हर साल गणेश चतुर्थी के अगले दिन और हरताविका तीज व्रत के ठीक दूसरे दिन मनाया जाता है। शास्त्रो के अनुसार यह व्रत महिलाओं के लिए अटल सौभाग्य प्राप्त करने वाला व्रत माना जाता है। ऋषि पंचमी के दिन सप्त ऋषियों के प्रति श्रद्धा भाव व्यक्त किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि ऋषि पंचमी के दिन व्रत को रखने से जाने अनजाने में किये गए पापों से मुक्ति मिलती है। ऋषि पंचमी के दिन गंगा स्नान का भी विशेष महत्व है।

ऐसी मान्यता है कि लगातार सात वर्ष तक ऋषि पंचमी के दिन व्रत रख कर आठवें वर्ष में सात सोने की मूर्तियां बनवाकर और उनका पूजन करके सात गोदान तथा सात युग्मक-ब्राह्मण को भोजन कराकर सप्त ऋषियों की प्रतिमाओं का विसर्जन करना चाहिए। और इस दिन अगर कोई महिला महावारी के दौरान नियम तोड़ दे तो वह ऋषि पंचमी के दिन सप्ता ऋषि की पूजा करके अपनी भूल सुधारने के बाद दोष मुक्त हो सकती है। आईये जानते है साल 2030 में ऋषि पंचमी (Rishi Panchami) का व्रत कब रखा जाएगा ? जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस दिन किये जाने वाला उपाय

2030 में ऋषि पंचमी कब है: Rishi Panchami 2030 Date And Time New Delhi India

व्रत त्यौहारव्रत त्यौहार समय
ऋषि पंचमी02 सितम्बर 2030, दिन सोमवार
ऋषि पञ्चमी पूजा मुहूर्त02 सितम्बर 2030, सुबह 11:04 से दोपहर 01:३7 मिनट पर
पूजा की अवधि02 घण्टा 32 मिनट
पञ्चमी तिथि प्रारम्भ01 सितम्बर 2030, रात 10:37 मिनट पर
पञ्चमी तिथि समाप्त02 सितम्बर 2030, रात 08:37 मिनट पर

ऋषि पंचमी पूजा विधि

ऋषि पंचमी के दिन सप्तऋषियों की पूजा की जाती है। ऋषि पंचमी का व्रत शुद्ध मन से करने पर व्यक्ति के सारे दुख दूर हो जाते हैं। और महिलाओं को अटल सौभाग्य की प्रान्ति होती है। ऋषि पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवित्र होकर व्रती महिलाएं सप्तऋषि की प्रतिमा बनाती है।

उसके बाद कलश की स्थापना करती है कलश स्थापना करने के बाद हल्दी, कुमकुम,वदन, पुष्प और अक्षत से पूजा करती है। इसके बाद धूप-दीप जलाकर, सप्तऋषियों को फल का भोग लगाती है। यदि संभव हो तो इस दिन महिलाओ को अनाज का सेवन नही करना चाहिए। बल्कि इस व्रत में फलाहार का सेवन करे, इस व्रत में विधि-विधान से सप्तऋषियों की पूजा के बाद ऋषि पंचमी व्रत कथा सुने या पढ़ें।

ऋषि पंचमी का उपाय

  • ऋषि पंचमी के दिन सूर्योदय से पहले उठकरं स्नान करे और पीले वस्त्र पहनकर भगवान गणेश को हरी इलायची अर्पण करके उनके समक्ष घी का दीपक जलाने से न सिर्फ जीवन में शुभता बढ़ती है। बत्कि भगवान गणेश जी के आशीर्वाद से व्यक्ति को रिद्धि सिद्दी की प्राप्ति होती है।
  • ऐसी मान्यता है की जो भी लोग ऋषि पंचमी के दिन व्रत करके इस उपाय को करता है तो उसे सभी सुख वैभव और धन धान्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • ऐसी मान्यता है कि ऋषि पंचमी (Rishi Panchami) के दिन किसी देवी देवता की पूजा नही की जाती है बल्कि इस दिन सप्तऋषियों का पूजन किया जाता है।
  • धार्मिक मान्यता है कि ऋषि पंचमी का व्रत सुहागिन महिलाओं के साथ-साथ कुआरी लडकिया भी इस व्रत को रखती है। बल्कि यह मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए नही किया जाता है बल्कि इसका विशेष प्रयोजन होता है।

ऋषि पंचमी व्रत उद्यापन विधि

  1. भाद्रपद शुक्ल पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. घर के पूजा स्थल को गाय के गोबर से लीपकर शुद्ध करें और वहां चौक पूरें।
  3. पूजा स्थान पर कलश स्थापित करें और सात ऋषियों तथा अरुंधति की प्रतिमा या प्रतीक (सुपारी) स्थापित करें।
  4. ऋषि पंचमी (Rishi Panchami) के दिन हल्दी, कुमकुम, चंदन, पुष्प और अक्षत से सप्तऋषियों की पूजा करें। धूप और दीप दिखाएं।
  5. सप्तऋषि की कहानी पढ़ें या सुनें।
  6. सात पुरोहितों या ब्राह्मणों को घर बुलाकर उन्हें सप्तऋषि मानकर सम्मानपूर्वक सात्विक भोजन कराएं।
  7. भोजन के बाद ब्राह्मणों को दक्षिणा और अपनी क्षमतानुसार वस्त्र/दान दें।
  8. पूजा संपन्न होने के बाद गाय को भोजन कराएं।

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