Narad Jayanti 2028: नारद जयंती को हिन्दू धर्म में विशेष महत्व दिया जाता है। जो हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा (या शुक्ल पक्ष की द्वितीया) को मनाया जाता है। यह तिथि देवर्षि नारद के जन्मोत्सव के रूप में बहुत श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार देवर्षि नारद जी को भगवान ब्रह्मा का मानस पुत्र के रूप में जाना जाता है। जो की भगवान विष्णु के अनन्य भक्त हैं और उन्हें ब्रह्मांड का प्रथम संदेशवाहक या पहला पत्रकार भी कहा जाता है।
नारद जी को ज्ञान और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से नारद जी की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और ज्ञान की प्राप्ति होती है। अब आईये जानते है साल 2028 में नारद जयंती (Narad Jayanti) कब है? 09 या 10 मई, जानिए पूजा की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस दिन किये जाने वाले उपाय-
2028 में नारद जयंती कब है: Narad Jayanti 2028 Date And Time New Delhi India
| व्रत त्यौहार | व्रत त्यौहार समय |
|---|---|
| नारद जयंती | 09 मई 2028, दिन मंगलवार |
| प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ | 09 मई 2028, सुबह 01:18 मिनट पर |
| प्रतिपदा तिथि समाप्त | 09 मई 2028, रात 11:31 मिनट पर |
नारद जयंती पूजा विधि
नारद जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करके साफ कपड़े पहन ले इसके बाद पुरे घर में गंगाजल छिड़ककर शुद्धिकरण करें इसके बाद पूजा स्थान पर एक लकड़ी की चौकी या फिर लाल रंग का कपड़ा विछाकर उसपर भगवान विष्णु और नारद जी की मूर्ति या फिर फोटो स्थापित करे इसके बाद भगवान विष्णु जी के सामने शुद्ध देशी घी का दीपक जलाकर फल, फूल, चंदन अर्पित करें इसके बाद पंचामृत का भोग लगाएं और उसमें तुलसी जरूर रखें इसके बाद नारद जी का ध्यान करें और किसी जरुरत मंद को दान जरुर करे और मुखे को भोजन जरुर करना चाहिएऔर विष्णु मंदिरों में जानकर बांसुरी भेंट करना बेहद शुभ माना जाता है।
नारद जयंती पर किए जाने वाले मुख्य उपाय
- नारद जयंती के दिन शहद का दान करें और थोड़ा सा शहद स्वयं भी प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। ऐसा करने से वाणी में मिठास और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है।
- और नारद जयंती (Narad Jayanti) के दिन शुभ मुहूर्त में ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ या ‘ॐ नारायणाय नमः मंत्र का 108 बार जाप करें। इससे मन शांत होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- देवर्षि नारद भगवान विष्णु के परम भक्त हैं। इसलिए इनकी पूजा में भगवान विष्णु को पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें। इसके साथ ही नारद जी का ध्यान करते हुए उन्हें फल और मिठाई का भोग लगाएं।
- नारद जयंती आत्ममंथन का भी दिन है। इस दिन यह संकल्प लें कि आप अपनी वाणी का उपयोग सदैव सत्य, ज्ञान और भलाई के लिए करेंगे।
- जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और शिक्षा से जुड़ी वस्तुओं (जैसे किताबें, पेन) का दान करें। ब्राह्मणों या संतों को भोजन कराना भी अत्यंत शुभ माना गया है
