2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कब है: Krishna Janmashtami 2026 Date And Time New Delhi India

Krishna Janmashtami 2026: हिन्दू धर्म मे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत का विशेष महत्व है। यह हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी हिंदी कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को मनई जाती है, जिसे गोकुलाष्टमी भी कहा जाता है। इसे भगवान विष्णु के 8वें अवतार, श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसके अलावा भाद्रपद की अष्टमी को बुराई पर अच्छाई (कंस वध) की जीत और अधर्म के अंत के रूप में भी मनाया जाता है। यह त्योहार आध्यात्मिक चेतना, समर्पण और भगवान के प्रति प्रेम का प्रतीक है। मान्यता अनुसार, इस दिन व्रत रखने से पापों का नाश होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

ऐसी मान्यता है कि द्वापरयुग में आज के दिन ही भगवान विष्णु ने श्री कृष्ण के रूप में अवतार लिया था। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म जन्माष्टमी के दिन रोहिणी नक्षत्र में मध्य रात्रि को मथुरा में हुआ था। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन व्रत उपवास रखकर भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामना पूरी होती है। आईये जानते है साल 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami) कब है? 04 या 05 सितम्बर, नोट करे पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, और महत्व

2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कब है: Krishna Janmashtami 2026 Date And Time New Delhi India

व्रत त्यौहारव्रत त्यौहार समय
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी04 सितम्बर 2026, दिन शुक्रवार
पूजा का शुभ मुहूर्त05 सितम्बर 2026, रात 11:५७ से सुबह 12:४५ मिनट तक
पूजा की कुल अवधिकेवल ४५ मिनट
अष्टमी तिथि प्रारम्भ होगी04 सितम्बर २०२६, सुबह 02:25 मिनट पर
अष्टमी तिथि समाप्त होगी05 सितम्बर 2026, सुबह 12:13 मिनट पर

कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि

धार्मिक मान्यता के अनुसार सप्तमी तिथि को सातविक भोजन ग्रहण करके अगले दिन जन्माष्टमी पर प्रातः काल स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लेकर पूरा दिन निर्जला व्रत का उपवास करे। और निशित काल पूजा मुहूर्त मे भगवान श्रीकृष्ण के लड्डू गोपाल स्वरूप की पूजा करे। पूजा करने से पहले लड्डू गोपाल की मूर्ति को गंगा जल से स्नान कराकर शृंगार करे। और उनका प्रिय माखन मिस्त्री का भोग लगाएं। इसके बाद नार वाला खीरा काटकर बाल गोपाल का जन्म कराये। और भजन कीर्तन करते हुए रात्रि जागरण करे। और सुबह यानी नवमी तिथि के व्रत का पारण करें।

कृष्ण जन्माष्टमी व्रत के नियम

  • शास्त्रों के अनुसार, जन्माष्टमी व्रत की पहली रात्रि में सात्विक भोजन करना चाहिए। और ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद हाथों में तुलसी की एक पत्ती लेकर व्रत का संकल्प करना चाहिए।
  • और जो लोग जन्माष्टमी का व्रत रखें है। वो लोग माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु को कमल के फूलों से सजाएं। और भगवान श्रीकृष्ण को फल, दही, दूध, पंचामृत का भोग लगाएं। इसके बाद पानी में तुलसी की पत्ती डालकर सेवन करें। फिर नंद गोपाल को पंचामृत से स्नान कराएं और उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।
  • और अविवाहित लोग व्रत के एक दिन पहले और जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami) व्रत के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें. और फिर भगवान श्री विष्णु की पूजा करें। और मध्यान के समय तिल के पानी से स्नान करें। फिर रात में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के समय नए वस्त्र धारण करें।
  • जन्माष्टमी व्रत में पूजा करने के समय आपका मुख पूर्व या उत्तर की दिशा में होना चाहिए। व्रती अपने व्रत का पारण मध्यरात्रि की पूजा के बाद ही करना चाहिए।

जन्माष्टमी कैसे मनाई जाती है?

  • व्रत और उपवास: श्रद्धालु पूरे दिन उपवास रखते हैं और आधी रात को “बाल गोपाल” के जन्म के बाद इसे खोलते हैं।
  • दही-हांडी: महाराष्ट्र और उत्तर भारत के कई हिस्सों में भगवान कृष्ण की बाल-लीलाओं की याद में ‘दही-हांडी’ प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है।
  • झांकी और रासलीला: मंदिरों में भगवान कृष्ण के जीवन की सुंदर झांकियां सजाई जाती हैं और मथुरा-वृंदावन में विशेष रासलीला का आयोजन होता है।
  • अभिषेक: आधी रात को बाल कृष्ण की मूर्ति को दूध, दही, घी, और शहद (पंचामृत) से स्नान कराया जाता है।

2027 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कब है

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