Jyeshtha Purnima 2030: 2030 में ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत कब है, जाने शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और उपाय

Jyeshtha Purnima 2030: ज्येष्ठ पूर्णिमा का हिन्दू धर्म में बड़ा महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार हिन्दू धर्म मे पूर्णिमा तिथि बहुत ही खास मानी जाती है। यह पूर्णिमा हिंदी पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि के दिन ज्येष्ठ पूर्णिमा मनाई जाती है। और इस दिन वट सावित्री पूर्णिमा व्रत भी रखा जाता है। इसलिए ज्येष्ठ पूर्णिमा (Jyeshtha Purnima) के दिन पूरे विधि-विधान के साथ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। और इसके अलावा जेष्ठ पूर्णिमा के दिन स्रान-दान और वट वृक्ष की पूजा करने का विधान है। हिन्दू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह हिन्दू वर्ष का तीसरा महीना होता है। इसलिए धार्मिक दृष्टिकोण देखा जाय तो ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन स्नान, तप और दान-धर्म करने का विधान है।

ऐसी मान्यता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाए पूर्ण होती हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से व्यक्ति के सभी पापों का छय होता है। इसके साथ ही इस दिन दान करने से पितृ अति प्रसन्न होते है। और अपने पौत्र, पुत्रो को आशीर्वाद देते है। इसीलिए इस दिन ख़ास तौर पर महिलाओं को व्रत करने की सलाह दी जाती है। इस दिन विशेष रूप से भगवान शंकर व भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिये। आईये जानते है साल 2030 में ज्येष्ठ पूर्णिमा कब है ? 15 या 16 जून, जानिए सही तिथि, पूजा शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस दिन किये जाने वाले उपाय –

Jyeshtha Purnima 2030 Date Time: 2030 में ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत कब है, New Delhi, India

व्रत त्यौहारव्रत त्यौहार समय
जेष्ठ पूर्णिमा व्रत15 जून 2030, शनिवार
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ15 जून 2030, सुबह 03:49 मिनट पर
पूर्णिमा तिथि समाप्त16 जून 2030, सुबह 12:10 मिनट पर
चंद्रोदय का समयशाम 07:0१ मिनट पर

ज्येष्ठ पूर्णिमा पूजा विधि Jyeshtha Purnima Puja Vidhi

जेष्ठ पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर दैनिक क्रिया से निपटकर स्नान आदि करले इसके बाद साफ कपड़े पहनकर एकादशी व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजा स्थल को अच्छे से साफ-सफाई करे। इसके बाद पूजा स्थल पर एक लकड़ी की चौकी लेकर उसपर पिला वस्त्र विछाकर उसपर भगवान विष्णु की फ़ोटो या मूर्ति स्थापित करे। इसके बाद भगवान विष्णु के समकक्ष धूप, दिप, रोली, चंदन, मौली आदि से पूजा अर्चना करे। इसके बाद भगवान सत्यनारायण कथा का पाठ करे। और रात में चंद्रमा को दूध और शहद मिलाकर अर्घ्य देना चाहिए। जिससे सभी रोग और कष्ट दूर होता है और व्रती की सभी मनोकामना पूरी होती है। और उन्हें जीवन में किसी चीज की कमी नहीं रहती है। और पूजा के अंत में ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देना चाहिए।

ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत के नियम Jyeshtha Purnima Vrat Niyam

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन स्नान ध्यान और पुण्य कर्म करने का विशेष महत्व है। इसके साथ ही यह दिन उन लोगों के लिये भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। जिन पुरुष और महिलाओं का विवाह होते होते रुक जाता है या फिर उसमें किसी भी प्रकार की कोई बाधा आ रही होती है। ऐसे लोग यदि आज के दिन श्वेत वस्त्र धारण करके भगवान भोलेनाथ को जल अर्पित करें और भगवान शिव की पूजा करें तो उनके विवाह में आने वाली हर समस्या दूर होती है।

ज्येष्ठ पुर्णिमा के दिन क्या करे Jyeshtha Purnima Kya Karen

ज्येष्ठ पुर्णिमा के दिन पीपल के पेड़ पर भगवान विष्णु संग माता लक्ष्मी वास करती हैं। इसलिए यदि कोई व्यक्ति एक लोटे में पानी भर कर उसमें कच्चा दूध और बताशा डालकर पीपल के पेड़ को अर्पित करता है। तो इससे उस व्यक्ति का रुका हुआ धन प्राप्‍त होता है। और उसके कारोबार में उन्नति होती है।

यदि जेष्ठ पुर्णिमा (Jyeshtha Purnima) के दिन पति और पत्नी भगवान चंद्र देव को दूध का अर्ध्य देते है। तो उनके जीवन में आ रही हर छोटी-बड़ी समस्या दूर होती है। इसके अलावा यदि आज की रात यदि कोई किसी कुएं में एक चम्‍मच दूध डालता है तो उसका भाग्‍य चमक जाएगा।

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन माँ लक्ष्‍मी की तस्वीर पर 11 कौड़ियां चढ़ा कर उस पर हल्‍दी से तिलक लगाना चाहिए। इसके पश्चात अगली सुबह इन्‍हें किसी लाल कपड़े में बांध कर अपनी तिजोरी में रख दें। ऐसा करने से आपकी आर्थिक स्थिति बदलने लगती है।

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