Mahavir Jayanti 2028: हिंदी पंचांग के अनुसार हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन महावीर जयंती मनाई जाती है। हिंदी पंचांग के अनुसार इस दिन भगवान महावीर का जन्म हुआ था। ऐसी मायन्ता है कि इनका जन्म 599 ईसा पूर्व में बिहार के कुंडलपुर के राजघराने में हुआ था। भगवान महावीर के बचपन का नाम वर्धमान था। इन्होंने 30 वर्ष की आयु में ही राज महलों के सुख को त्याग कर सत्य की खोज में जंगलों में चले गए।
और इन्होंने घने जंगलों में रहते हुए बारह वर्षों तक कठोर तपस्या की जिसके बाद ऋजुबालुका नामक नदी के तट पर साल वृक्ष के नीचे बैठकर उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। और वही पर भगवान महावीर ने समाज के सुधार और लोगों के कल्याण के लिए उपदेश दिए। इन्होंने ने मोक्ष प्राप्त करने के लिए पांच नियम स्थापित किए। जिन्हें हम पंच सिद्धांत के नाम से जानते हैं। ये पांच सिद्धांत हैं। जैसे- अहिंसा, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, सत्य और अपरिग्रह आदि।
Mahavir Jayanti जैन संप्रदाय के लोगों के लिए बहुत ही खास मानी जाती है। Mahavir Jayanti के शुभ अवसर पर जैन समाज के लोग प्रभातफेरी, अनुष्ठान और अन्य अध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन करते हैं। साथ ही इस दिन भगवान महावीर की प्रतिमा पर सोने या चांदी के कलश से जल अर्पित करते है। और उनके उपदेशों का पूर्ण श्रद्धाभाव से श्रवण करते है। आईये जानते है साल 2028 में महावीर जयंती कब है? जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इनके जीवन से जुड़ी कुछ महत्व पूर्ण बाते
2028 में महावीर जयंती कब है: Mahavir Jayanti 2028 Date And Time New Delhi India
| व्रत त्यौहार | व्रत त्यौहार समय |
|---|---|
| महावीर जयंती | 07 अप्रैल 2028, शुक्रवार |
| त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ | 07 अप्रैल 2028, सुबह 01:51 मिनट पर |
| त्रयोदशी तिथि समाप्त | 07 अप्रैल 2028, रात 10:३२ मिनट पर |
महावीर जयंती पूजा विधि
महावीर जयंती जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। जो भगवान महावीर के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। इसलिए Mahavir Jayanti के दिन व्रती सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और शुद्ध वस्त्र धारण करे। इसके बाद अपने घर के मंदिर में एक पूजा स्थल तैयार करके उसे साफ़ और शुद्ध करें। इसके बाद पूजा स्थल पर भगवान महावीर की मूर्ति की स्थापना करें। फिर पूजा के लिए आवश्यक सामग्री जैसे कि फूल, फल, धूप, दीप, और प्रसाद तैयार करें। इसके बाद भगवान महावीर की मूर्ति के सामने खड़े होकर पूजा करें। और भोग के रूप में भगवान महावीर जी को फूल, फल, धूप, दीप, और प्रसाद चढ़ाएं। इसके बाद भगवान महावीर के मंत्रों का जाप करें। जैसे कि नमो महावीराय भगवान महावीर की आरती करें। फिर पूजा के बाद प्रसाद का वितरण करें। इसके बाद Mahavir Jayanti के दिन दान और पुण्य करना भी शुभ माना जाता है। इसलिए गरीबों और जरूरतमंदों को दान दक्षिणा दें।
भगवान महावीर स्वामी के 15 प्रमुख उपदेश
- अहिंसा परमो धर्मः – किसी भी जीव को मन, वचन और कर्म से कष्ट न दें।
- सत्य बोलो – हमेशा सत्य का पालन करें, चाहे परिस्थिति कैसी भी हो।
- अस्तेय – बिना अनुमति किसी की वस्तु न लें (चोरी न करें)।
- ब्रह्मचर्य – इंद्रियों पर संयम रखें और पवित्र जीवन जिएँ।
- अपरिग्रह – आवश्यकता से अधिक संग्रह न करें, मोह त्यागें।
- सभी जीव समान हैं – किसी के साथ भेदभाव न करें।
- क्षमा सबसे बड़ा गुण है – क्रोध को त्यागकर क्षमा अपनाएँ।
- संयम से ही मुक्ति संभव है – आत्मसंयम मोक्ष का मार्ग है।
- कर्म का सिद्धांत – जैसा कर्म करोगे, वैसा फल पाओगे।
- लोभ त्यागो – लालच दुःख का कारण है।
- आत्मा शुद्ध है – आत्मा को पहचानो और उसे कर्मों से मुक्त करो।
- सादा जीवन जियो – सादगी और संतोष अपनाओ।
- ध्यान और आत्मचिंतन करो – आत्मज्ञान से ही मुक्ति मिलती है।
- क्रोध, मान, माया, लोभ से दूर रहो – ये आत्मा के शत्रु हैं।
- मोक्ष ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है – जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति पाना।
