Vaishakh Purnima 2030: 2030 में वैशाख पूर्णिमा व्रत कब है, जाने शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व व उपाय

Vaishakh Purnima 2030: हिन्दू धर्म मे वैशाख पूर्णिमा व्रत का विशेष महत्व है। हिंदी पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को वैशाख पू्णिमा मनाई जाती जाती है। और वैसाख पुर्णिमा को सत्य विनायक पुर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार वैशाख पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने का विशेष महत्व बतलाया गया है। ऐसी मान्यता है कि वैशाख पूर्णिमा के दिन ही भगवान विष्णु का तेइसवां अवतार महात्मा बुद्ध के रूप में हुआ था। इसलिए वैसाख पूर्णिमा के दिन महात्मा बुद्ध की जयंती के रूप में भी मनाई जाती है।

शास्त्रो के अनुसार Vaishakh Purnima के दिन पवित्र नदी में स्नान, दान, पूजा-पाठ आदि करने का विशेष महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि वैसाख पूर्णिमा के दिन भगवान की पूजा आराधना करने से सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। और उसके उलार भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसके अलावा वैशाख पूर्णिमा के दिन भगवान धर्मराज की पूजा करने का विधान है। इसलिए इस व्रत के प्रभाव से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्री कृष्ण के बचपन के साथी सुदामा जब द्वारिका उनके पास मिलने पहुंचे। तो भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें सत्य विनायक पूर्णिमा व्रत करने का विधान बतलाया था। इसलिए Vaishakh Purnima व्रत के प्रभाव से सुदामा की सारी दरिद्रता दूर हो गयी। इसलिए वैशाख पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने के बाद व्रत और पुण्य कर्म करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। आईये जानते है साल 2030 में वैशाख पूर्णिमा कब है ? 16 या १७ मई, जाने शुभ मुहूर्त, पूजा विधि महत्व और इस दिन किये जाने वाले उपाय –

Vaishakh Purnima 2030 Date Time: 2030 में वैशाख पूर्णिमा व्रत कब है, New Delhi, India

व्रत त्यौहारव्रत त्यौहार समय
वैशाख पूर्णिमा व्रत17 मई 2030, शुक्रवार
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ16 मई 2030, रात 08:36 मिनट पर
पूर्णिमा तिथि समाप्त१७ मई 2030, शाम 04:48 मिनट पर
चंद्रोदय का समयशाम 07:11 मिनट पर

वैसाख पूर्णिमा पूजा विधि Vaishakh Purnima Puja Vidhi

वैसाख पूर्णिमा के दिन सूबह प्रातःकाल जल्दी उठकर नित्य क्रिया से निवृत्त होकर किसी भी पवित्र नदी, सरोवर, कुंड, तालाब आफ में स्नान करें। यदि ऐसा करना सम्भव ना हो तो घर पर ही गंगाजल मिले जल से स्नान करके साफ शुद्ध कपड़े पहनकर व्रत का संकल्प ले। इसके बाद पूजा स्थल को अच्छे से साफ-सफाई करके पूजा स्थल पर एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा विछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या फोटो स्थापति करे।

इसके बाद भगवान विष्णु के समीप धूप, दीप जलाये। इसके बाद भगवान विष्णु जी को तुलसी दल अर्पित करे। इसके बाद कनकधारा स्तोत्र और विष्णु मंत्रों का जाप करें। इसके बाद भगवान सत्यनारायण की पूजा करके व्रत कथा का पाठ करे। और पूजा के अंत में आरती करके खीर का भोग लगाएं। और रात्रि में चंद्रदेव को अर्य देकर व्रत पूरा करे। और हो सके तो पूरी रात्रि भजन कीर्तन करते हुए रात्रि जागरण करे।

वैसाख पूर्णिमा व्रत उपाय Vaishakh Purnima Upay

धार्मिक मान्यता के अनुसार वैसाख पूणिमा (Vaishakh Purnima) के दिन माता लक्ष्मी जी के मंदिर में जाकर झाड़ का दान करना शुभ माना जाता है। इसलिए आज के दिन जो भी लोग झाड़ू का दान करते है उनके ऊपर माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और अपार धन की प्राप्ति होती है।

ऐसी मान्यता है कि वैशाख पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी को 11 पीली कोड़ियां चढ़ाने के बाद अगले दिन इन कोड़ियों को घर के तिजोरी में लाल कपड़े में बांधकर रखने से धन प्राप्ति के बनते है।

वैशाख पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी को खीर का भोग लगाकर इसे प्रसाद स्वरुप परिवार के सभी लोगों में बांटे और स्वयं भी ग्रहण करे।

वैसाख पूर्णिमा (Vaishakh Purnima) के दिन बुध पूर्णिमा भी मनाई जाती है इसलिए आज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान करें और पूजा के स्थान को साफ करके माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें और पूजा के बाद “ऊ श्रींलक्ष्मी नारायणाय नमः” मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से माता जल्दी प्रसन्न होती है और सभी मनोकामनाएं पूरी करती है।

वैसाख पूर्णिमा के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करें और उस पर जल, दूध और घी अर्पित करें। और पीपल वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करे इसके बाद पीपल के पेड़ के चारों घी का दीप प्रज्वलित करें और माता लक्ष्मी से धन-वैभव की प्रार्थना करे।

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