2026 में तारा जयंती कब है: Tara Jayanti 2026 Date Time New Delhi India

Tara Jayanti 2026: हिन्दू धर्म मे तारा जयंती का विशेष महत्व है। तारा देवी दस महाविद्याओं में से एक मानी जाती है। जो हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष चैत्र मास की शुक्लपक्ष की नवमी तिथि के दिन महा तारा जयंती मनायी जाती है। ऐसी मान्यता है कि माता तारा देवी की उत्तपत्ति मेरु पर्वत के पश्चिमी भाग में चोलना नदी के तट पर हुआ था। माता तारा देवी भगवान शिव के तारकेश्वर रुद्रावतार की शक्ति मानी जाती हैं। ऐसी मान्यता है कि सर्व प्रथम माता तारा देवी की पूजा महर्षि वसिष्ठ जी ने की थी। माता तारा देवी की पूजा मुख्य रुप से जो लोग तंत्र, मन्त्र में विश्वास रखते उनके लिए यह पूजा सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।

ऐसी मान्यता है कि माता तारा देवी की पूजा अर्चना करने से वाणी में शक्ति प्राप्त होती है। और शत्रुओं से रक्षा होती है तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा जब किसी व्यक्ति के जीवन में बहुत सारी समस्याएं होती हैं। और कोई समाधान नहीं होता है। तो माता तारा देवी उसकी सभी समस्याओं और पापों को नष्ट करके अपनी उपस्थिति का एहसास कराती हैं। अब आइये जानते साल 2026 में तारा जयंती कब मनाई जाएगी 26 या 27 मार्च, जानिये पूजा की सही तिथि, पूजा की विधि, पूजा का शुभ मुहूर्त, भोग और इस दिन क्या करना चाहिए क्या नही करना चाहिए-

2026 में तारा जयंती कब है Tara Jayanti 2026 Date Time New Delhi India

व्रत त्यौहारव्रत त्यौहार समय
तारा जयंती26 मार्च 2026, दिन गुरुवार
नवमी तिथि प्रारम्भ होगी26 मार्च 2026, सुबह 11:48 मिनट पर
नवमी तिथि समाप्त होगी27 मार्च 2026, सुबह 10:06 मिनट

तारा जयंती पूजा विधि Tara Jayanti Puja Vidhi

माता तारा देवी की पूजा अर्धरात्रि में किया जाता है। माता तारा देवी की पूजा अकेले एकांत जगहों पर किया जाता है। माता तारा देवी की पूजा करने से पहले पूजा स्थल की अच्छे से साफ सफाई करके स्नान आदि करके सफेद वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प ले। इसके बाद पूजा स्थल पर एक लकड़ी की चौकी पर गंगाजल छिड़कर उसे शुद्ध करके उसपर लाल या गुलाबी रंग का कपड़ा बिछाकर उसपर माता की मूर्ति या फ़ोटो स्थापित करे।

और तारा यंत्र की स्थापना करके यंत्र के चारों ओर चावल की ढेरियां बनाएं। और उस चावल पर एक- एक लौंग रखे फिर तारा यंत्र के सामने घी का दीपक जलाएं और इस मन्त्र ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट् जाप करे। इसके बाद माता तारा की कथा सुने और पूजा के अंत मे माता की आरती करके पूजा समाप्त करे। और पूजा समाप्त करने के बाद सभी पूजन सामग्री को बहते हुए जल में प्रवाहित करें। या फिर किसी पीपल पेड़ की नीचे रखदे या फिर किसी सुन सान जमीन में गाड़ दे।

तारा माता का भोग Tara Mata Ka Bhog

  • तारा जयंती (Tara Jayanti) के दिन माता तारा देवी की आराधना करने के बाद माता तारा देवी को विशेष रूप से पांच प्रकार का भोग अर्पित किया जाता है जैसे- मिश्री के जल, खीर, दही, मिठाई इत्यादि

तारा जयंती व्रत के उपाय

  • तारा जयंती व्रत के दिन पितृ दोष या किसी भी प्रकार के दोष से मुक्ति के लिए 108 बार माता तारा के मंत्र “ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट्” का जाप करें।
  • पूजा के बाद तारा यंत्र को अपनी तिजोरी में रखें।
  • तारा जयंती के दिन 10 वर्ष से कम उम्र की 9 कन्याओं को भोजन कराएं और उन्हें अपनी सामर्थ के अनुसार दान दें।

2027 में तारा जयंती कब है

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