Pradosh Vrat List 2028: प्रदोष व्रत 2028 की तारीखें कब-कब पड़ेगी New Delhi, India

Pradosh Vrat List 2028: शास्त्रो में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बतलाया गया है। हिंदी पंचांग के अनुसार साल में 2 बार त्रयोदशी तिथि आती है। एक शुक्लपक्ष में तो दूसरी कृष्णपक्ष में त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत करने का विधान है। मान्यता है की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष काल मे भगवान शिव की आराधना करने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती है। मान्यता है कि शुक्ल पक्ष ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसलिए शुक्ल पक्ष में प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) करने से परिवार में सुख शांति आती है और परिवार की सदैव उन्नति होती है। जबकि कृष्ण पक्ष में प्रदोष व्रत कष्ट निवारण, दोष मुक्ति और आत्मशुद्धि के लिए विशेष फलदायी होता है। प्रदोष व्रत के अलग-अलग दिन जैसे सोम प्रदोष, शनि प्रदोष और भौम प्रदोष का भी अपना अलग धार्मिक महत्व है।

प्रदोष व्रत का महत्व

प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। यह व्रत महिलाओं के लिए अत्यंत मंगलकारी उपवास में से एक है। जो हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि सायंकाल यानी (प्रदोष काल) में भगवान शिव जी की पूजा करने से रोग, दोष, दरिद्रता और दुखों का नाश होता है। और सुख-समृद्धि, लंबी आयु और संतान प्राप्ति का वरदान प्राप्त है। यह व्रत मानसिक शांति और पापों से मुक्ति पाने के लिए किया जाता है।

प्रदोष व्रत के नियम

प्रदोष व्रत निर्जला व्रत होता है इसलिए प्रदोष व्रत करने वालों को दिन भर पानी नहीं पीना चाहिए। हालांकि किसी तरह की सेहत संबंधी परेशानी होने पर पानी पीना वर्जित नहीं माना गया है। इसलिए व्रत करने वाले शाम को भगवान शिव की पूजा करने के बाद जल ग्रहण कर सकते हैं। प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) का पारण अगले दिन किया जाता है। यानी व्रत करने वाले चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव की पूजा के बाद पारण करते हैं. व्रत के दिन पानी पीने से व्रत खंडित हो सकता है। इसलिए कोशिश करे कि आज के दिन पानी बिलकुल ना पिए।

Pradosh Vrat List 2028 Date Time: 2028 में प्रदोष व्रत कब-कब पड़ेगे जनवरी से दिसम्बर तक

व्रत त्यौहारव्रत त्यौहार समय
पौष शुक्ल प्रदोष व्रत09 जनवरी २०२8, दिन रविवार
माघ कृष्ण प्रदोष व्रत23 जनवरी २०२8, दिन रविवार
माघ शुक्ल प्रदोष व्रत08 फरवरी 2028, दिन मंगलवार
फाल्गुन कृष्ण प्रदोष व्रत22 फरवरी 2028, दिन मंगलवार
फाल्गुन शुक्ल प्रदोष व्रत08 मार्च 2028, दिन बुधवार
चैत्र कृष्ण प्रदोष व्रत23 मार्च 2028, दिन गुरुवार
चैत्र शुक्ल प्रदोष व्रत07 अप्रैल 2028, दिन शुक्रवार
वैशाख कृष्ण प्रदोष व्रत22 अप्रैल 2028, दिन शनिवार
वैशाख शुक्ल प्रदोष व्रत06 मई 2028, दिन शनिवार
ज्येष्ठ कृष्ण प्रदोष व्रत21 मई 2028, दिन रविवार
ज्येष्ठ शुक्ल प्रदोष व्रत04 जून 2028, दिन रविवार
आषाढ़ कृष्ण प्रदोष व्रत20 जून 2028, दिन मंगलवार
आषाढ़ शुक्ल प्रदोष व्रत04 जुलाई 2028, दिन मंगलवार
श्रावण कृष्ण प्रदोष व्रत19 जुलाई 2028, दिन बुधवार
श्रावण शुक्ल प्रदोष व्रत02 अगस्त 2028, दिन बुधवार
भाद्रपद कृष्ण प्रदोष व्रत18 अगस्त 2028, दिन शुक्रवार
भाद्रपद शुक्ल प्रदोष व्रत01 सितम्बर 2028, दिन शुक्रवार
आश्विन कृष्ण प्रदोष व्रत16 सितम्बर 2028, दिन शनिवार
आश्विन शुक्ल प्रदोष व्रत30 सितम्बर 2028, दिन शनिवार
कार्तिक कृष्ण प्रदोष व्रत15 अक्तूबर 2028, दिन रविवार
कार्तिक शुक्ल प्रदोष व्रत30 अक्तूबर 2028, दिन सोमवार
मार्गशीर्ष कृष्ण प्रदोष व्रत14 नवम्बर 2028, दिन मंगलवार
मार्गशीर्ष शुक्ल प्रदोष व्रत29 नवम्बर 2028, दिन बुधवार
पौष कृष्ण प्रदोष व्रत13 दिसम्बर 2028, दिन बुधवार
पौष शुक्ल प्रदोष व्रत29 दिसम्बर 2028, दिन शुक्रवार

प्रदोष व्रत पूजा विधि

प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) के दिन व्रती प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प ले। फिर सबसे पहले भगवान सूर्य देव को जल का अर्ध्य दे, और विधिवत भगवान शिव माता पार्वती का पूजा करे। प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय करने की मान्यता है, इसीलिए सायंकाल पूजा के शुभ मुहूर्त में पुनः स्वच्छ होकर गाय के टूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करें। फिर शिवलिंग पर श्वेत चंदन लगाकर बेलपत्र, मदार, पुष्प, भस्म आदि अर्पित करे। इसके बाद शनि व्रत की कथा पढ़कर आरती करे इसके पच्यात भगवान शिव माता पार्वती की आरती करें।

प्रदोष व्रत का उद्यापन कब कैसे करे

प्रदोष व्रत उद्यापन 11 या 22 प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) रखने के बाद कर देना चाहिए। तभी एस व्रत का लाभ मिलता है, लेकिन प्रदोष व्रत का उद्यापन करने से पहले कुछ विशेष बातो का ध्यान जरुर रखना चाहिए। जैसे –

  • प्रदोष व्रत का उद्यापन हमेशा त्रयोदशी तिथि को ही करना चाहिए।
  • प्रदोष व्रत करने से पहेशा भगवान गणेश की पूजा करना चाहिए।
  • प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) का उद्यापन करने से एक पहले वाली रात में रात्री जागरण करने हुए भजन कीर्तन करना चाहिए।
  • और अगले दिन यानी त्रयोदशी तिथि के दिन सुबह पूजा के लिए मंडप तैयार करना चाहिए।
  • इसके बाद ॐ उमाम्हेश्व्राए नमः और ॐ शिवाय नमः मंत्र का १०८ बार जाप करके हवन करना करना चाहिए।
  • इसके बाद हवन समाप्त होने के बाद माता पार्वती, भगवान शिव जी, भगवान गणेश जी, और कार्तिके भगवान के साथ नन्दी जी की पूजा आवश्य करनी चाहिए।
  • इसके बाद पूजा समाप्त होने के बाद किसी भी जरुरत मंद ब्राम्हण को दान दक्षिणा देकर व्रत का पारण करना चाहिए। तभी प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

प्रदोष व्रत की कथा Pradosh Vrat Ki Katha

प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) भगवान शिव को समर्पित है, और यह हर महीने के दोनों पक्षों (शुक्ल और कृष्ण) की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस व्रत को करने से व्यक्ति को भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, और उसके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

प्रदोष व्रत की कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव और माता पार्वती ने अपने भक्तों की परीक्षा लेने का निर्णय किया। उन्होंने एक गरीब ब्राह्मण और उसकी पत्नी को बुलाया और उन्हें अपना भक्त बनाने का निश्चय किया।

ब्राह्मण और उसकी पत्नी बहुत ही गरीब थे, लेकिन वे बहुत ही सच्चे और ईमानदार थे। भगवान शिव ने उन्हें प्रदोष व्रत करने की सलाह दी और कहा कि इस व्रत को करने से उनकी गरीबी दूर हो जाएगी।

ब्राह्मण और उसकी पत्नी ने प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) करना शुरू किया और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने लगे। उनकी भक्ति और श्रद्धा से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और उनकी गरीबी दूर कर दी।

तब से प्रदोष व्रत की परंपरा शुरू हुई, और जो भी व्यक्ति इस व्रत को करता है, उसे भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। इस व्रत को करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है, और उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

प्रदोष व्रत के दिन भक्त भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं, और उन्हें बेल पत्र, धतूरा, और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। इस दिन व्रत करने वाले भक्त भगवान शिव की स्तुति और आराधना करते हैं, और उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं।

2029 में प्रदोष व्रत कब है

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