Pausha Putrada Ekadashi 2027: 2027 में पौष पुत्रदा एकादशी कब है, नोट करले शुभ मुहूर्त, पूजा विधि व महत्व

Pausha Putrada Ekadashi 2027: एकादशी व्रत का हिन्दू धर्म मे विशेष महत्व होता है। क्योकि सभी एकादशी व्रत में सबसे महत्वपूर्ण पौष पुत्रदा एकादशी है। हिंदी पंचांग के अनुसार प्रयेक वर्ष पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पौष पुत्रदा एकादशी व्रत के नाम से जाना जाता है। पौष पुत्रदा एकादशी व्रत के दिन जो लोग माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूरे विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करते है। उनपर भगवान विष्णु जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। और इस व्रत को रखने से योग्य तथा होनहार पुत्र की प्राप्ति होती है। और जिन महिलाओं का गर्भ नही ठहरता है और समय के पहले गर्भपात हो जाता है उनके लिए पौष पुत्रदा एकादशी Pausha Putrada Ekadashi का व्रत रखना विशेष फलदायी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो भी लोग पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत रखते है। उनको केवल दिन में एक बार सात्विक भोजन करना चाहिए। और पूरे दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। अब आइये जानते है साल 2027 में पौष पुत्रदा एकादशी (Pausha Putrada Ekadashi) कब है? 18 या 19 जनवरी, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस दिन किये जाने वाले उपाय

Pausha Putrada Ekadashi 2027 Date Time: 2027 में पौष पुत्रदा एकादशी कब है, New Delhi, India

व्रत त्यौहारव्रत त्यौहार समय
पौष पुत्रदा एकादशी18 जनवरी 2027, सोमवार
एकादशी तिथि प्रारम्भ18 जनवरी 2027, सुबह 10:26 मिनट पर
एकादशी तिथि समाप्त19 जनवरी 2027, सुबह 07:49 मिनट पर
व्रत पारण का शुभ मुहूर्त19 जनवरी 2027, दोपहर 01:34 मिनट से दोपहर 03:42 मिनट पर

पौष पुत्रदा एकादशी पूजा विधि

Pausha Putrada Ekadashi के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान आदि करके व्रत का संकल्प लेते हुए भगवान विष्णु का ध्यान करें। इसके बाद मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर स्थापित करें। फिर भगवान विष्णु के आगे घी का दीपक जलाएं और कलश का स्थापना करें। इसके बाद कलश को लाल कपड़ें से बांधकर उसकी भी पूजा करें। इसके बाद धूप-दीप आदि से विधिवत भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करें। और अगले दिन द्वादशी पर किसी जरुरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन कराकर। और उन्हें दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करना चाहिये।

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत में क्या करे

Pausha Putrada Ekadashi व्रत से पहले दशमी तिथि के दिन एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए। और व्रती को पूरे दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत के दिन व्रती को प्रातःकाल जल्दी उठकर नित्य क्रिया से निपटकर स्नान आदि करके व्रत का संकल्प लेना चाहिए।

पौष पुत्रदा एकादशी के दिन व्रती को भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए गंगा जल, तुलसी दल, तिल, फूल पंचामृत आदि से भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए।

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत के दिन व्रती को संध्या काल में दीपदान करने के बाद मौसमी फलों का सेवन करना चाहिए।

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत के अगले दिन द्वादशी तिथि के दिन किसी भी जरुरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन कराकर, दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करना चाहिए।

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत में क्या ना करे

Pausha Putrada Ekadashi व्रत के दिन प्रातःकाल लकड़ी की दातुन नही करना चाहिए।

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत के दिन मांस, मछली, लहसुन, प्याज, मसूर की दाल का सेवन नही करना चाहिए।

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत के दिन गाजर, शलजम, गोभी, पालक, और पान नही खाना चाहिए।

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत के दिन कोई भी व्यक्ति आप को किसी भी प्रकार अन्न दे रहा है उसे कदापि नही लेना चाहिए।

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत के दिन किसी को भी अपशब्द ना बोले, किसी के साथ छल कपट न करे, किसी की बुराई ना करे। और पौष पुत्रदा एकादशी व्रत के दीन किसी से झूठ ना बोले

२०२8 में पौष पुत्रदा एकादशी कब है

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