Makar Sankranti 2027: हिन्दू धर्म मे मकर संक्रांति पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान सूर्यदेव उत्तरायण होते है। और इस दिन धनुराशि को छोड़कर मकर राशि मे प्रवेश करते है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान सूर्य देव अपने पुत्र शनिदेव से मिलने के लिए जानते है। जो कि शनि देव मकर राशि के स्वामी माने जाते हैं। इस लिए इस पर्व को मकरसंक्रांति के नाम से जाना जाता है। इसदिन भगवान सूर्यदेव की पूजा करने का विशेष महत्व है।
मकरसंक्रांति के दिन किसी भी पवित्र नदी में स्नान दान करने का बहुत महत्व है। मकर संक्रांति के दिन सूर्योदय होने से पहले स्नान करना चाहिए। ऐसा करने से दस हजार गौ दान करने जितना फल प्राप्त होता है। ऐसे मान्यता है कि मकरसंक्रांति के दिन उड़ी कपड़े, कम्बल, तिल, और गुड़ सबने व्यजन व खिचड़ी दान करने से भगवान सूर्यदेव और भगवान शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य देव की पूजा आराधना करने से मनुष्य के सभी कष्ट दूर होते हैं। और घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। इस दिन से सूर्य की उत्तरायण गति भी आरंभ होती है और इसी कारण इसको उत्तरायणी भी कहते हैं। आइये जानते है साल 2027 में मकर संक्रांति कब (Makar Sankranti) है? 14 या 15 जनवरी जानिए सही तिथि, स्नान दान का शुभ मुहूर्त और जानेगे मकरसंक्रांति क्यो मनाई जाती है?
2027 में मकरसंक्रांति कब है? Makar Sankranti 2027 Date Time
| व्रत त्यौहार | व्रत त्यौहार समय |
|---|---|
| मकरसंक्रांति | 15 जनवरी 2027, दिन शुक्रवार |
| मकरसंक्रांति पुण्य काल समय | सुबह 07:15 से शाम 07:46 मिनट तक |
| अवधि | 10:31 मिनट |
| मकरसंक्रांति महापुण्य काल समय | सुबह 07:15 से सुबह 09:00 बजे तक |
| अवधि | 01:45 मिनट |
| मकर संक्रान्ति का क्षण | 14 जनवरी 2027, रात 09:14 मिनट पर |
मकर संक्रांति पूजा विधि
मकर संक्रांति के दिन सर्योदय से पहले उठकर दैनिक क्रिया से निपटकर किसी पवित्र नदी तालाब या पोखर में जाकर स्नान करें। यदि ऐसा करना सम्भव नही है तो घर पर ही पानी मे गंगाजल मिलाकर स्नान करके सूर्य देव को जल का अर्घ्य दे। और ऊं सूर्याय नमः मंत्र का जाप करे।
मकरसंक्रांति के दिन पानी में काला तिल और गंगाजल मिला कर स्नान करने से कुडली के ग्रहदोष दूर होते हैं। इसके बाद भगवान सर्यदेव की पूजा करने के बाद तिल, उड़द दाल, चावल, गुड़़, धन अदि का किसी ब्राह्मण को दान करना चाहिए साथ ही इस दिन भगवान को तिल और खिचड़ी का भोग लगाना शुभ होता है।
मकर संक्रांति से जुड़ी कथा
1. मकर संक्रांति के दिन ही भगवान विष्णु जी के अंगूठे से निकली देवी गंगा जी भागीरथी के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थी।
2. महाभारत काल के दौरान भी जब भीष्मपितामह ने ऐसी दिन को चुना था। और ऐसी दिन माता यशोदा ने भी भगवान श्रीकृष्ण को पाने के लिए व्रत भी किया था।
मकर संक्रांति का महत्व
मकर संक्रांति के पर्व को विभिन्न राज्यो में अलग-अलग नामो से जाना व मनाया जाता है जैसे –
उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व कहा जाता है। इस दिन भगवान सूर्यदेव की पूजा की जाती है। और चावल दान की किछड़ी बनाकर खाई, खिलाई व दान की जाती है।
गुजरात राजस्थान में मकरसंक्रांति पर्व को उत्तरायनपर्व के रूप में जनाव मनाया जाता है। इस दिन दोनो ही राज्यो में बड़े ही धूम धाम के साथ पतंग उत्सव का आयोजन भी किया जाता है।
आंध्रप्रदेश में संक्रांति नाम से तीन दिन का पर्व मनाया जाता है।
तमिलनाडु में खेती किसानी के प्रमुख पर्व के रूप में मकरसंक्रांति पर्व को पोंगल पर्व के नाम से मनाया जाता है। इस दिन घी में चावल दाल की किछड़ी पकाई व खिलाई जाती है।
महाराष्ट्र में भी इस पर्व को मकरसंक्रांति पर्व रूप मनाया जाता है। यहां लोग गजक और टिल के लड्डू बनाकर खाते और खिलाते और दान करते है। और एक दूसरे को भेट देकर शुभ कामनाएं देते है।
पश्चिम बंगाल में मकरसंक्रांति के दिन हुगली नदी पर गंगा सागर मेले का आयोजन भी किया जाता है। तो असम में ऐसे भुगली बिहू के नाम से भी जाना व मनाया जाता है।
