Hartalika Teej Vrat 2030: हिन्दू धर्म में हरतालिका तीज व्रत का विशेष महत्व होता है। हरितालिका तीज व्रत भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीया को तीज मनाई जाती है। सुहागिन महिलाओ के लिए यह व्रत श्रेष्ठ और उत्तम मन जाता है। ऐसी मान्यता है की इस व्रत को करने से करवा माता अति प्रसन्न होती है अति ऊत्तम फल प्रदान करती है। और उसके सभी प्रकार के रोग-शोक दूर होते है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को हस्त नक्षत्र में भगवान शिव और माता पार्वती के पूजन का विशेष महत्व है।
हरतालिका तीज व्रत (Hartalika Teej Vrat) को सभी सौभाग्यवती महिलाओं द्वारा किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि सभी सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और पुत्र प्राप्ति के साथ पुत्र की दीर्घायु होने के लिए हरितालिका तीज का व्रत रखती है। तो वही कुआरी लडकिया भी सुंदर घर व वर पाने के लिए हरितालिका तीज का व्रत रखती है। इस व्रत को विधवा महिलाएं भी कर सकती हैं। हरतालिका तीज व्रत पूरे दिन निराहार और निर्जला रहकर किया जाता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार सबसे पहले इस व्रत को माता पार्वती ने भगवान शिवशंकर को पति के रूप में पाने के लिए किया था। इसलिए सभी सौभाग्यवति महिलाएं सौभाग्य की प्राप्ति के लिए माता पार्वती और भगवान भोलेनाथ की पूजा हरतालिका तीज व्रत के दिन करती है। आईये जानते है साल 2030 में हरतालिका तीज व्रत (Hartalika Teej Vrat) कब है 31 अगस्त या 01 सितम्बर , जानिए सही दिन व तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस दिन किये जाने वाले उपाय-
2030 में हरतालिका तीज व्रत कब है: Hartalika Teej Vrat 2030 Date Time Shubh Muhurat
| व्रत त्यौहार | व्रत त्यौहार समय |
|---|---|
| हरतालिका तीज व्रत | 31 अगस्त 2030, दिन शनिवार |
| तृतीया तिथि प्रारम्भ | 31 अगस्त 2030, सुबह 02:1२ मिनट पर |
| तृतीया तिथि समाप्त | 01 सितम्बर 2030, सुबह 12:30 मिनट पर |
| प्रात:काल पूजा का शुभ मुहूर्त | 31 सितम्बर 2030, सुबह 05:59:०० बजे से सुबह 08:32:०० मिनट |
| प्रात:काल पूजा की कुल अवधि | 02:46:०० मिनट पर |
| सायंकाल पूजा का शुभ मुहूर्त | 31 सितम्बर 2030, शाम 06:44:00 बजे से रात 08:59 मिनट तक |
| सायंकाल पूजा की कुल अवधि | 02:15:00 मिनट तक |
हरतालिका तीज पूजा विधि
हरतालिका तीज व्रत (Hartalika Teej Vrat) प्रदोष व्रत में किया जाता है। धर्मिक मान्यता के अनुसार प्रदोष काल सूर्यास्त होने के बाद यानी तीन मुहूर्त को प्रदोषकाल कहा जाता है। इसलिए यह दिन और रात के मिलन का समय होता है। हरतालिका पूजन के लिए सबसे पहले सभी व्रती महिलाएं स्नान आदि करके व्रत का संकल्प लेती है। इसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की काली मिट्टी व बालू रेत से प्रतिमा अपने हाथों से बनाती है।
इसके बाद पूजा स्थान पर एक कलश की स्थापना करती है। इसके बाद पूजा स्थान को सुंदर फूलों से सजाकर उसपर एक चौकी चौकी रखती है। इसके बाद उस चौकी पर केले के पत्ते रखकर भगवान शिवशंकर, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा या फ़ोटो स्थापित करती है। इसके बाद सभी देवी देवताओं का आह्वान करते हुए भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश का पूरे विधि विधान के साथ पूजन करती है। इसके बाद सभी सुहागिन महिलाएं सुहाग की पिटारी में सुहाग की सभी सामग्री रखकर माता पार्वती को चढ़ाती है।
इसमें भगवान शिव जी को धोती और गमछा चढ़ाती है। इसके बाद सुहाग की सभी सामग्री सास के चरण स्पर्श करके ब्राह्मणी और ब्राह्मण को दान देना शुभ माना जाता है। और पूजा के अंत मे हरितालिका तीज व्रत (Hartalika Teej Vrat) की कथा सुनती है और रात्रि जागरण करती है। इसके बाद माता पार्वती और भगवान भोलेनाथ की आरती करके सुबह माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाकर ककड़ी-हलवे का भोग लगाकर व्रत खोलती है।
हरतालिका तीज व्रत के दिन क्या करे
- हरतालिका तीज व्रत (Hartalika Teej Vrat) के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का सुबह और शाम दोनो पहर पूजा करने का विधान है।
- हरतालिका तीज व्रत के दिन सभी सुहागिन महिलाओ को सोलह सिंगार जरूर करना चाहिए।
- लेकिन हरतालिका तीज व्रत के दिन सुहागिन महिलाओं को काले या सफेद रंग के वस्त्र नही पहनना चाहिए।
हरतालिका तीज व्रत के दिन क्या ना करे
- हरतालिका तीज व्रत के दिन सभी व्रती महिलाओं को नमक से बना हुआ कोई भी पदार्थ नही खाना चाहिए।
- बल्कि हरतालिका तीज व्रत (Hartalika Teej Vrat) के दिन हो सके तो सेंधा नमक से बना हुआ कोई भी पदार्थ खा सकती है।
- हरतालिका तीज व्रत के दिन व्रती महिलाएं व्रत से एक दीन पहले से ही लहसुन, प्याज, का सेवन करना बंद करदे।
- और हो सके तो हरतालिका तीज व्रत के दिन मौसमी फलों का सेवन कर सकती है।
