Govardhan Puja 2029: गोवर्धन पूजा का हिन्दू धर्म मे विशेष महत्व है। हिंदी पंचांग के अनुसार गोबर्धन पूजा प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। और इस पर्व को अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है जो भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है। और इस दिन गौधन यानी गाय-बैलों की भी पूजा की जाती है। गोबर्धन पूजा दीवाली की सुबह मनाया जाता है। तो कही पर दीवाली से दूसरे दिन मनाया जाता है।
ऐसी मान्यता है कि इस दिन महिलाएं अपने घर के आंगन में गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाती हैं और उसकी पूजा करती हैं। इस दिन भगवान श्री कृष्ण को 56 प्रकार का भोग लगाने की परंपरा है। तो कुछ स्थानों पर इस दिन गायों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि गोवर्धन पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में धन, संतान, और गौ रस की वृद्धि होती है। और मनुष्य की सभी मनोकामनाओ की पूर्ति होती है। आइये जानते है साल 2029 में गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja) कब है ? 06 या 07 नवम्बर, जानिए पूजा का सही डेट व समय, पूजा विधि, पूजा शुभ मुहूर्त व महत्व –
2029 में गोवर्धन पूजा कब है? Govardhan Puja 2029 Date And Time For New Delhi
| व्रत त्यौहार | व्रत त्यौहार समय |
|---|---|
| गोवर्धन पूजा | 06 नवम्बर 2029, दिन मंगलवार |
| प्रतिप्रदा तिथि प्रारम्भ होगी | 06 नवम्बर 2029, सुबह 09:53:00 मिनट पर |
| प्रतिप्रदा तिथि समाप्त होगी | 07 नवम्बर 2029, सुबह 06:07:00 मिनट पर |
| सायंकाल पूजा का शुभ मुहूर्त | दोपहर 03:21:30 बजे से शाम 05:32:47 मिनट तक |
| पूजा की कुल अवधि | 02:11:00 मिनट तक |
गोवर्धन पूजा विधि
गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja) का पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर शरीर पर तेल की मालिश करके स्नान आदि करके साफ व शुद्ध वस्त्र धारण करे। इसके बाद व्रत का संकल्प ले। और फिर घर के मुख्य दरवाजे पर गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाएं। और इस पर्वत के बीच में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति रख दें।
इसके बाद गोवर्धन पर्वत व भगवान श्रीकृष्ण को विभिन्न प्रकार के पकवानों व मिष्ठानों का भोग लगाएं। और साथ ही देवराज इंद्र, वरुण, अग्नि और राजा बलि की भी पूजा करें। और पूजा करने के बाद कथा सुनें। इसके बाद प्रसाद के रूप में दही व चीनी का मिश्रण सब में बांट दें। इसके बाद किसी योग्य ब्राह्मण को भोजन करवाकर उसे दान-दक्षिणा देकर प्रसन्न करें।
गोवर्धन पूजा के दिन क्या नहीं करना चाहिए?
- गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja) के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करके घर के आंगन या फिर घर के मुख्य द्वार के सामने गाय के गोवर से लेटे हुए पुरुष की आकृति बनाये और रोली, चावल, दूध, दही, से पूजा करे।
- ऐसी मान्यता है कि घर में गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के बाद उस मिट्टी/गोबर को घर में सुरक्षित रखने से घर में धन की वृद्धि होती है
- गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja) के दौरान गाय को स्नान कराकर उसे फूल, माला, से सजाकर उसे गुड़ और हरा चारा खिलाये।
- गोवर्धन पूजा के दिन शाम के समय तुलसी माता की पूजा करके धूप-दीप जलाएं। और भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करे।
- गोवर्धन पूजा के दौरान अपने बही खाते की पूजा जरूर करनी चाहिए। और नये कार्य का शुभारंभ करना चाहिए।
गोवर्धन पूजा के दिन क्या नहीं करना चाहिए?
- गोवर्धन पूजा के दौरान इस्तेमाल किये गए गोबर और मिट्टी को कुरा कचरा में नही फेकना चाहिए। बल्कि उसे किसी भी सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए।
- हो सके तो गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja) दोपहर के 12 बजे से लेकर 3 बजे तक नही करना चाहिए।
- गोवर्धन पूजा के दौरान काले और नीले रंग का वस्त्र नही पहनना चाहिए।
- गोवर्धन पूजा के दौरान लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा, और किसी भी तामसिक चोजी से दूर रहना चाहिए।
