2030 में संत कबीर दास जयंती कब है: Sant Kabirdas Jayanti 2030 Date New Delhi India

Sant Kabirdas Jayanti 2030: हिंदी पंचांग के अनुसार हर वर्ष ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि को संत कबीर दास जी की जयंती लगभग सम्पूर्ण भारत वर्ष मनाई जाती है। संत कबीर दास जी का जन्म वाराणसी में संवत्‌ लगभग 1455 ईसवी में ज्येष्ठ मास की पुर्णिमा तिथि को ब्रम्हमुहूर्त में हुआ था। कबीर दास जी ने समाज मे रहते हुए अपने दोहे के माध्यम से जन जागरण की अलख जगाने की कोशिश की समाज से पाखंड को हटाना, और समाज सुधार के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशश की थी। इसलिए इन्हें समाज सुधारक के रूप में भी जाना जाता है।

कबीर दास जी ने सुखी और सफल जीवन के लिए कुछ अनमोल बिचार अपने दोहे के माध्यम से इंसान के जीवन की नई प्रेरणा देते थे। कबीर दास जी ने अपने उपदेशों में हमेशा प्रेम, सहिष्णुता और भाईचारे पर बल दिया। उन्होंने जाति-पाति और ऊंच-नीच के भेदभाव को गलत बताया। भक्तिकाल के प्रमुख कवि संत कबीरदास न सिर्फ एक संत थे। बल्कि वे एक विचारक और समाज सुधारक भी थे।

समाज की दोष को खत्म करने के लिए उन्होंने अपने पूरे जीवन में कई दोहे और कविताओं की रचना की और अपने साहित्य लेखन के जरिए उन्होंने आजीवन समाज में फैले अंधविश्वास और आडंबरों की न सिर्फ निंदा की बल्कि अपने दोहों के माध्यम से जीवन को सही ढंग से जीने की सीख हमें दी। आइए जानते है साल 2030 में संत कबीर दास जयंती (Sant Kabirdas Jayanti) कब मनाई है? 15 या 16 जून, जानिए सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और इनका संक्षिप्त जीवन परिचय के बारे में

2030 में संत कबीर दास जयंती कब है? Sant Kabirdas Jayanti 2030 Date New Delhi India

व्रत त्यौहारव्रत त्यौहार समय
संत कबीर दास जयंती15 जून 2030, दिन शनिवार
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ होगी15 जून 2030, सुबह 03:49 मिनट पर
पूर्णिमा तिथि समाप्त होगी16 जून 2030, सुबह 12:10 मिनट पर

कबीर दास जयंती पूजा विधि Sant Kabirdas Jayanti Puja Vidhi

कबीरदास जयंती ज्येष्ठ पूर्णिमा (Jyeshtha Purnima) पर भक्त सुबह स्नान करके, कबीर साहेब या कबीर पंथी मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं। और कबीर दास के अनुयायी एकत्रित होकर संत कबीर के दोहे और भजन गाते हैं, जो एकता और प्रेम का संदेश देते हैं। कबीर दास की शिक्षाओं, जैसे कि निस्वार्थ भक्ति और समाज सुधार, पर चर्चा और उनके दोहों का पाठ किया जाता है। कबीर पंथी, कबीर साहेब की स्तुति में विशेष प्रार्थना (आरती/ध्यान) करते हैं। कबीर जी के विचारों का प्रचार करने के लिए, विशेष रूप से वाराणसी में, झांकियां और शोभायात्राएं निकाली जाती हैं। कबीर जयंती पर लोग गरीबों को भोजन और कपड़े वितरित करते हैं, जो उनके समानता के संदेश को दर्शाता है। कबीरदास जी के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए उनके चित्रों पर फूल चढ़ाए जाते हैं, न कि मूर्ति पूजा (जिसका कबीर ने विरोध किया था।

कबीर दास जयंती (Sant Kabirdas Jayanti) के दिन क्या करना चाहिए

  • कबीर दास जयंती के दिन जीवन मे सुख-शांति पाना चाहते है तो कभी भी अपनी योग्यता का घमंड नही करना चाहिए। वरना आप की योग्यता समाप्त हो जाएगी।
  • कबीर दास जयंती (Sant Kabirdas Jayanti) के दिन घर परिवार में बाद विवाद नही करना चाहिए। और पति पत्नी को धैर्य, सैयम से रहना चाहिए। एक दूसरे की पूरी बात समझे के बाद ही उत्तर देना चाहिए। अगर इस बात का ध्यान रखोगे तो वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आएगी।

कबीर दास के अनमोल वचन

  • बड़ा भया तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर।।
  • पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय। ढाई अक्षर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।।
  • धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय। माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय।।
  • माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर। कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।
  • दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय। जो सुख में सुमिरन करे, तो दुःख काहे को होय॥
  • काल करे सो आज कर, आज करे सो अब। पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब।।

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