Yashoda Jayanti 2027: हिंदी पंचांग के अनुसार, हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को यशोदा जयंती मनाई जाती है। इस दिन माता यशोदा की पूजा-उपासना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि यशोदा मैया की पूजा करने से सुख, सौभाग्य और वैभव की प्राप्ति होती है। और जीवन मे आने वाली सभी परेशानियां दूर होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि यशोदा जयंती के दिन श्रद्धा-भाव से भगवान श्री कृष्ण और माता यशोदा जी की पूजा आराधना करने से भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप के दर्शन होते हैं। और भगवान श्रीकृष्ण सभी कष्टों को दूर करते है। ऐसी मान्यता है कि यशोदा माता का केवल नाम मात्र लेने से ही मन में ममता की प्रतिमूर्ति प्रकाशित होती है।
ऐसी मान्यता है कि यशोदा जयंती के दिन माता यशोदा की व्रत और पूजा करने से माता यशोदा शीघ्र प्रसन्न होती हैं। और इनकी कृपा से सन्तान सुख, पारिवारिक प्रेम, सुख-शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यशोदा जयंती के दिन मंदिरों और मठों को सजाया जाता है। भजन कीर्तन का आयोजन किया जाता है। और जगह जगह माता यशोदा की शोभायात्रा भी निकाली जाती हैं। और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर आकर मांता के दर्शन करके उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। आईये जानते है साल 2027 में यशोदा जयंती (Yashoda Jayanti) कब है? 25 या 26 फरवरी, जानिए दिन व तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत का महत्व –
2027 में यशोदा जयंती कब है – Yashoda Jayanti 2027 Date And Time New Delhi India
| व्रत त्यौहार | व्रत त्यौहार समय |
|---|---|
| यशोदा जयंती | 25 फरवरी २०27, दिन शुक्रवार |
| षष्ठी तिथि प्रारम्भ होगी | 25 फरवरी 2027, रात 08:17:०० मिनट पर |
| षष्ठी तिथि समाप्त होगी | 26 फरवरी 2027, रात 08:42:०० मिनट पर |
यशोदा जयंती पूजा विधि – Yashoda Jayanti Puja Vidhi
यशोदा जयंती के दिन प्रातःकाल उठकर नित्यक्रियाओं से निवृत होकर स्नान आदि कर के साफ वस्त्र धारण करे। इसके बाद व्रत का संकल्प लें, इसके बाद एक साफ लकड़ी की चौकी लेंकर उसपर थोड़ा सा गंगाजल छिड़कर कर इसे पवित्र कर लें। फिर माता यशोदा का ध्यान करें, इसके बाद लकड़ी की चौकी पर लाल रंग का कपड़ा विछाकर एक कलश की स्थापना करें। कलश को स्थापित करने के बाद माता यशोदा की गोद में विराजमान लड्डू गोपाल की तस्वीर या मूर्ति को स्थापित करें।
इसके बाद माता यशोदा को लाल रंग की चुनरी के साथ साथ माता यशोदा को कुमकुम, फल, फूल, मीठा रोठ, पंजीरी, माखन आदि सभी चीजें अर्पित करे। इसके बाद माता यशोदा के समक्ष धूप और दीप जलाएं। और माता यशोदा और भगवान श्री कृष्ण की विधि विधान के साथ पूजा करें। और यशोदा जंयती की कथा सुने और माता यशोदा और लड्डू गोपाल की आरती करें। आरती करने के पश्चात् माता यशोदा और भगवान श्री कृष्ण को मीठे रोठ का भोग लगाएं।
इसके बाद भगवान श्री कृष्ण को पंजीरी और माखन का भोग अर्पित करें। पूजा समाप्त होने के बाद अपने दोनों हाथ जोड़कर माता यशोदा और लड्डू गोपाल से पूजा के दौरान हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा याचना करें। और पूजा के बाद स्वयं पंजीरी का प्रसाद ग्रहण करें और परिवार के सभी लोगों को प्रसाद वितरित करें। पूजा संपन्न करने के बाद गाय को भोजन अवश्य कराएं।
यशोदा जयंती के दिन क्या करें
धार्मिक मान्यता के अनुसार जो महिलाए संतान सुख से वंचित है या किसी भी कारण से संतान का सुख नहीं पायी है। वो सभी महिलाओ को यशोदा जयंती (Yashoda Jayanti) के दिन माता यशोदा की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करनी चाहिए। माता यशोदा की पूजा करने के लिए माता यशोदा की मूर्ति या फोटो लेकर उसका फूल-माला और गहनों से श्रृगार करे। और माता यशोदा को लड्डू, दूध, फल का भोग लगाए और ॐ यशोदानन्दने नमःमंत्र का जाप करे। आप की सभी मनोकामना पूरी होगी और जल्द ही सन्तान सुख की प्राप्ति होगी।
यशोदा जयंती की कथा – Yashoda Jayanti Ki Katha
यशोदा जयंती भगवान कृष्ण की पालनहार माता यशोदा के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। यशोदा माता का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को होता है, जिसे यशोदा जयंती के रूप में मनाया जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, यशोदा माता का विवाह नंद बाबा से हुआ था, और उन्होंने भगवान कृष्ण का पालन-पोषण किया था। यशोदा माता की गोद में कृष्ण ने अपना बचपन बिताया था, और उनकी ममता और प्रेम का प्रतीक हैं। यशोदा जयंती के दिन, भक्त माता यशोदा की पूजा-अर्चना करते हैं और उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं।
इस दिन, लोग अपने बच्चों के लिए सुख-समृद्धि और अच्छी सेहत की कामना करते हैं, और माता-पिता के प्रति सम्मान और प्रेम व्यक्त करते हैं। यशोदा जयंती का महत्व इस प्रकार है कि यह माता-पिता के प्रति सम्मान और प्रेम का प्रतीक है, और यह हमें अपने माता-पिता के ऋण को समझने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर प्रदान करती है।
