Shakambhari Jayanti 2027: 2027 में शाकंभरी जयंती कब है, नोट करे सही डेट टाइम, शुभ मुहूर्त, विधि विधि और उपाय

Shakambhari Jayanti 2027: पौष मास की शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि से पौष मास की पूर्णिमा तक शाकम्भरी नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। पौष मास की पूर्णिमा के दिन Shakambhari Jayanti मनाई जाती है। मान्यता है कि माता शाकंभरी की पूजा से जीवन में समृद्धि, स्वास्थ्य और धन की प्राप्ति होती है। शाकम्भरी नवरात्रि के दौरान भक्तजन विशेष रूप से ताजे फल, सब्जियां और शाक को देवी को अर्पित करते हैं। शास्त्रो के अनुसार माता शाकंभरी देवी माता दुर्गा के सभी अवतारों में एक माना जाता हैं। कहा जाता है कि माता दुर्गा के सभी अवतारों में से रक्तदंतिका, भीमा, भ्रामरी, शताक्षी तथा शाकम्भरी आदि देवियां प्रसिद्ध हैं।

आप को बतादे की वैसे तो वर्ष भर में कुल चार नवरात्रि मनाई जाती है। एक आश्विन माह के शुक्ल पक्ष में शारदीय नवरात्रि और दूसरी चैत्र मास के शुक्लपक्ष में चैत्र नवरात्रि मनाई जाती है। लेकिन दो और नवरात्रि मनाई जाती है जिसे गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। जो कि तृतीय और चतुर्थ नवरात्रि माघ और आषाढ़ माह में पड़ती है। गुप्त नवरात्रि में तंत्र-मंत्र के साधकों को अपनी सिद्धि के लिए खास माने जाने वाली Shakambhari Navratri का आरंभ पौष मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से होता है। यह नवरात्रि पौष मास की शुक्ल अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तिथि तक मनाई जाती है जिसमें देवी शाकम्भरी की पूजा की जाती है। आइये जानते है साल 2027 में शाकंभरी जयंती कब है, 21 या 22 जनवरी, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, और इस दिन किये जाने वाले उपाय

Shakambhari Jayanti 2027 Date Time: 2027 में शाकंभरी जयंती कब है, New Delhi, India

व्रत त्यौहारव्रत त्यौहार समय
शाकंभरी जयंती22 जनवरी 2027, शुक्रवार
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ21 जनवरी 2027, रात 09:29 मिनट पर
पूर्णिमा तिथि समाप्त22 जनवरी 2027, शाम 05:46 मिनट पर

शाकंभरी जयंती पूजा विधि

Shakambhari Jayanti के दिन प्रात:काल जल्दी उठकर स्नान करें। और साफ वस्त्र पहनकर माता शाकम्भरी का ध्यान करें। इसके बाद पूजा स्थल या मंदिर की अच्छे से साफ सफाई करके एक लकड़ी की चौकी पर माता शाकम्भरी की मूर्ति या फ़ोटो स्थापित करे। इसके बाद धूप,दीप,पुष्प आदि से माता की पूजा अर्चना करे। इसके बाद ताजे फल और सब्जियों से भोग लगाएं और गंगा जल का छिड़काव करें। और 

“शाकंभरी नीलवर्णानीलोत्पलविलोचना मुष्टिंशिलीमुखापूर्णकमलंकमलालया।।”

इस मंत्र का जाप करें। और पूजा के अंत में माता Shakambhari की कथा सुने या फिर पढे और फिर मंदिर में जाकर प्रसाद चढ़ाएं और जरूरतमंदों को दान करे। और पूजा के अंत मे माता शाकम्भरी की आरती करके पूजा समाप्त करे।

शाकंभरी पूर्णिमा के उपाय

पौष पूर्णिमा के दिन माता शाकंभरी को प्रसन्न करने के लिए जरूरत मंदों में अनाज, सब्जी व फल और अन्न का दान अवश्य करना चाहिए। अगर ऐसा ना कर पाएं तो किसी मंदिर में जाकर असहाय लोगो को आवश्यकता अनुसार रुपया पैसा का दान करे और हो सके तो मंदिर में भंडारा इत्यादि कराकर प्रसाद वितरण करे।

2028 में शाकंभरी जयंती कब है

Leave a Comment

error: Content is protected !!