Magh Gupt Navratri 2030: हिन्दू धर्म मे नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है। हिंदी पंचांग के अनुसार वर्ष में कुल चार नवरात्रि पड़ती है। एक चैत्र नवरात्रि और दूसरी शारदीय नवरात्रि, लेकिन इनके अलावा दो और नवरात्रि मनाई जाती है। एक माघ मास में गुप्त नवरात्रि और दूसरी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि भी मनाई जाती है। हिंदी पंचांग के अनुसार माघ मास में पड़ने वाली नवरात्रि को माघ Gupt Navratri कहते हैं। नवरात्री के दौरान माता दुर्गा के नव स्वरुप की पूजा की जाती है। लेकिन इन गुप्त नवरात्रि के दौरान दस महाविद्याओं की साधना की जाती है।
गुप्त नवरात्रि के दौरान माता काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, माता ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा की जाती है। Gupt Navratri के दिन तंत्र विद्या में विश्वास रखने वालो के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण होती हैं। इस दिन सभी तांत्रिक माता दुर्गा के सभी 10 रूपो की साधना करके ऋद्धि सिद्धि की प्राप्ति करते हैं। आईये जानते साल 2030 में माघ गुप्त नवरात्रि कब शुरू और कब समाप्त होगी। जाने सही दिन तारीख, कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि
Magh Gupt Navratri 2030 Date Time, 2030 में माघ गुप्त नवरात्रि कब है, New Delhi, India
| व्रत त्यौहार | व्रत त्यौहार समय |
|---|---|
| माघ गुप्त नवरात्रि प्रारंभ | 03 फरवरी २०30, रविवार |
| कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त | 03 फरवरी 2030, सुबह 09:11मिनट से सुबह 10:36 मिनट तक |
| कलश स्थापना की अवधि | 01:25 मिनट |
| कलश स्थापना अभिजित मुहूर्त | दोपहर 12:13 मिनट से दोपहर 12:५7 मिनट तक |
| कलश स्थापना की अवधि | केवल 44 मिनट |
| प्रतिप्रदा तिथि प्रारम्भ | 02 फरवरी 2030, रात 09:36 मिनट पर |
| प्रतिप्रदा तिथि समाप्त | 03 फरवरी 2030, रात 08:44मिनट पर |
| माघ गुप्त नवरात्रि समाप्त | 12 फरवरी 2030, मंगलवार |
Gupt Navratri पूजा विधि
गुप्त नवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके साफ कपड़े पहनकर व्रत का संकल्प ले। फिर पूजा सामग्री को एकत्रित करले। इसके बाद पूजा स्थल पर मांता दुर्गा की एक प्रतिमा या चित्र स्थापित करे। इसके बाद माता की तस्वीर पर लाल रंग के वस्त्र या चुनरी चढ़ाए। इसके बाद मिट्टी के एक बर्तन में जौ के बीज बोयें और नवमी तक हर दिन इसमें पानी का छिड़काव करते रहे। इसके बाद शुभ मुहूर्त में कलश की स्थापना करे। इसके लिए पहले कलश में गंगा जल भरें, उसके मुख पर आम की पत्तियां लगाएं और ऊपर नारियल रखें।
इसके बाद कलश को लाल कपड़े लपेटकर उसपर कलावा बांधे।इसके बाद माता दुर्गा की फूल, माला, कपूर, अगरबत्ती, दीप जलाकर पूजा करें। और नौ दिनों तक माता दुर्गा के मंत्र का जाप करें और माता का आव्हान करके उनसे सुख-समृद्धि की कामना करें। इसके बाद अष्टमी या नवमी को दुर्गा पूजा करने के बाद नौ कन्याओं का पूजन करें। और उन्हें तरह-तरह के व्यंजनों जैसे पूड़ी, चना, और हलवा आदि का भोग लगाएं। और नवरात्रि के आखिरी दिन माता दुर्गा का घट विसर्जन करें। इसके बाद नवरात्रि व्रत का पारण करें।
Gupt Navratri कलश स्थापना विधि
कलश स्थापना करने से पहले स्नान आदि करके शुद्ध होकर एक साफ जगह चुनें और उस स्थान को अच्छे साफ करके उस स्थान पर गंगाजल छिड़कर उसे शुद्ध करले। इसके बाद उस स्थान पर उस पर लाल कपड़ा बिछाएं। और मिट्टी या धातु के कलश में जल, गंगाजल, सुपारी, हल्दी, सिक्का, लौंग, इलायची, दूर्वा और अक्षत (चावल) डालें। कलश के मुख पर आम के 5 या 9 पत्ते (पंचपल्लव) रखें। पत्तों के ऊपर एक नारियल रखें और कलश के पास घी का दीपक जलाएं। इसके बाद दुर्गा सप्तशती या देवी मंत्रों का जाप करें और मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। और कलश पर पूरे नव दिन तक दीपक जलता रहे।
Gupt Navratri पूजा सामग्री
गुप्त नवरात्रि पूजा में मां दुर्गा की फोटो, लाल चुनरी, श्रृंगार सामग्री, जौ, मिट्टी के बर्तन, गंगाजल, आम की पत्तियां, चंदन, नारियल, कपूर, गुलाल, सुपारी, पान का पत्ता, चावल (अक्षत), लौंग, इलायची, फल, फूल, कलश, लाल वस्त्र, धूपबत्ती, दीपक, घी आदि शामिल करें।
Gupt Navratri व्रत के नियम
गुप्त नवरात्र के दौरान मांस-मदिरा, लहसुन और प्याज का बिल्कुल सेवन नहीं करना चाहिए।
माता दर्गा स्वयं एक नारी हैं, इसलिए नारी का सदैव सम्मान करना चाहिए। जो नारी का सम्मान करते हैं, माता दुर्गा उन पर अपनी कृपा बरसाती हैं।
नवरात्र के दिनों में घर में क्लेश, द्वेष या अपमान नहीं करना चाहिए, कहते हैं कि ऐसा करने से बरकत नहीं होती है।
नवरात्रि के दिनों में स्वच्छता का विशेष ख्याल रखना चाहिए और नौ दिनों तक सूर्योदय के साथ ही स्नान कर साफ वस्त्र धारण करने चाहिए।
नवरात्रि के दौरान काले रंग के वस्त्र नहीं धारण करने चाहिए और ना ही चमड़े के बेल्ट या जूते पहनने चाहिए।
मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान बाल, दाढ़ी और नाखून नहीं काटने चाहिए।
नवरात्रि के दौरान बिस्तर पर नहीं बल्कि जमीन पर सोना चाहिए और घर पर आए किसी मेहमान या भिखारी का अपमान नहीं करना चाहिए।
