Kartik Purnima 2029: हिन्दू धर्म मे कार्तिक पुर्णिमा का विशेष महत्व बतलाया गया है। यह पर्व हिंदी पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली पूर्णिमा तिथि को कार्तिक पूर्णिमा कहा जाता हैं। धर्म ग्रन्थों की माने तो कार्तिक पूर्णिमा के दिन संध्या के समय भगवान विष्णु का मत्स्यावतार हुआ था। इसलिए कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) के दिन गंगा में स्नान, दीपदान, होम यज्ञ और सभी देवी देवताओं की पूजा उपासना करने का विशेष दिन होता है। ऐसी मान्यता है की कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान शिव जी ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का बध किया था, इसलिए इसे ‘त्रिपुरी पूर्णिमा’ के नाम से भी जाना जाता हैं।
ऐसी मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही माता तुलसी का बैकुंठ में आगमन हुआ था। इसलिए कार्तिक पूर्णिमा के दिन माता तुलसी की पूजा का खास महत्व है। और कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) के दिन सभी देवी देवता धरती पर आके गंगा स्नान करते है इसलिए ऐसे देव दिवाली भी कहा जाता है। आईये जानते है साल 2029 कार्तिक पूर्णिमा कब है? 20 या 21 नवंबर, जानिए स्नान दान का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, चंद्रोदय का समय और इस दिन किये जाने वाले उपाय –
Kartik Purnima 2029 Date Time: 2029 में कार्तिक पूर्णिमा व्रत कब है, New Delhi, India
| व्रत त्यौहार | व्रत त्यौहार समय |
|---|---|
| कार्तिक पूर्णिमा व्रत | 21 नवम्बर 2029, बुधवार |
| पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ | 20 नवम्बर 2029, सुबह 07:01 मिनट पर |
| पूर्णिमा तिथि समाप्त | 21 नवम्बर 2029, सुबह 09:30 मिनट पर |
| चंद्रोदय का समय | शाम 05:28 मिनट पर |
कार्तिक पूर्णिमा पूजा विधि Kartik Purnima Puja Vidhi
कार्तिक पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर नित्य क्रिया से निपकर स्नान कर लें। इसके बाद साफ व शुद्ध कपड़े पहनकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर के मंदिर की अच्छे से साफ सफाई करके एक लकड़ी की चौकी पर भगवान विष्णु की मूर्ति या फ़ोटो स्थापित करे और उनके समक्ष धूप, दीप रोली, चंदन आदि से उनकी पूजा करे। इसके बाद भगवान विष्णु माता लक्ष्मी के साथ साथ सभी देवी-देवताओं का गंगा जल से अभिषेक करें। और चंद्रमा निकलने के बाद जल का अर्घ देने के बाद पूजा समाप्त करे।
कार्तिक पर्णिमा का महत्व Kartik Purnima Mahatva
शास्त्रो के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा बहुत खास मानी जाती है क्योकि कार्तिक मास का महीना सभी देवी देवताओं को एक साथ प्रसन्न करके उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। धार्मिक मान्यता है की कार्तिक मास में भगवान विष्णु का जल में वास होता है। इसलिए कार्तिक मास की पर्णिमा तिथि के दिन किसी पवित्र नदी, सरोवर, कुंड, तालाब, व कुएं पर स्नान करने से हमारे सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दीपावली का पर्व भी मनाया जाता है।
कार्तिक पूर्णिमा उपाय Kartik Purnima Upay
ऐसी मान्यता है कि कार्तिक पर्णिमा के दिन किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने के बाद भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार रूप को तुलसी दल चढ़ाना शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) के दिन जो भी यमुना जी में स्नान करके राधा-कृष्ण का पूजन करके नदियों में दीपदान करते है उनको भगवान विष्णु सहित सभी देवी देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
ऐसी मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) के दिन जो भी लोग नदियों में स्नान करके दीपदान करते है। और किसी भी जरूरत मन्द को जूते-चप्पल, और गर्म कपड़े के साथ चावल का दान करते है उनके घर धन की कमी नही होगी।
ऐसी मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन पीपल के पेड़ में जल और दूध चढाने के बाद शुद्ध घी का दीपक जलाने से माता लक्ष्मी की कृपा परिवार के ऊपर सदा बनी रहती है।
कार्तिक पूर्णिमा के दिन शाम के समय तुलसी के समक्ष घी का दीपक जलाकर उनकी पूजा करके चंद्रमा का दर्शन करने के बाद गंगाजल मिले जल में चावल डालकर अर्घ देने से सारे कष्ट दूर हो जाते है।
कार्तिक पूर्णिमा के दिन पास के किसी भी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर कच्वा दूध, शहद व गंगाजल आदि अर्पित करने से भगवान शिव अति प्रसन्न होते है।
कार्तिक पूर्णिमा की रात्रि में स्नान आदि करके गाय, हाथी, घोड़ा, रथ और घी आदि का दान करने से संपत्ति बढ़ती है। ऐसी मान्यता है कि Kartik Purnima के दिन भेड़ का दान करने से ग्रह दोष दूर होता है और समस्त कष्टों का नाश होता है। और जो लोग बैल का दान करते है उन्हें शिव पद की प्राप्ति होती है।
