Purnima 2029 All List: पूर्णिमा व्रत 2029 की तारीखें New Delhi, India

Purnima 2029: हिन्दू धर्म मे पूर्णिमा व्रत का विशेष महत्व बतलाया गया। हिंदी पंचांग के अनुसार प्रत्येक महीने की शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि को पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन आकाश में चंद्रमा अपने पूर्ण रूप में होता है। पूर्णिमा का अपना एक अलग ही महत्व होता है। हर महीने में आने वाली पूर्णिमा को कोई न कोई व्रत या त्यौहार जरूर मनाया जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन स्नान दान, धर्म के साथ-साथ व्रत करने का भी विशेष महत्व बतलाया गया। इसलिए पूर्णिमा के दिन तीर्थ स्थल के दर्शन, स्नान और दान-धर्म के लिए पूर्णिमा तिथि को बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन भगवान चन्द्रमा की पूजा की जाती है। और इसके अलावा पूर्णिमा के दिन बहुत से लोग भगवान सत्यनारायण की पूजा अर्चना करते और उनकी कथा का श्रवण करते है।

ऐसी मान्यता है कि पुर्णिमा के दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा अर्चना करने और व्रत उपवास रखे से व्यक्ति को हर तरह के सुख और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। पूर्णिमा तिथि के दिन अपने पूर्वजों को भी याद किया जाता है। पूर्णिमा हर महीने में एक बार जरूर आती है इसीलिए देखा जाये तो साल के 12 महीने में कुल 12 पूर्णिमा होती हैं। जिस दिन चन्द्रमा अपने पूरे आकार में होता है उस दिन को पूर्णिमा कहते है और जिस दिन चन्द्रमा दिखाई नहीं देता उस दिन को अमावस्या कहते हैं। आइये जानते है साल 2029 में पूर्णिमा व्रत की सभी तारीखे, जनवरी से दिसम्बर तक की डेट टाइम तिथि

Purnima 2029 All List: पूर्णिमा व्रत 2029 की तारीखें New Delhi, India

व्रत त्यौहारव्रत त्यौहार समय
माघ पूर्णिमा30 जनवरी 2029, मंगलवार
फाल्गुन पूर्णिमा28 फरवरी 2029, बुधवार
चैत्र पूर्णिमा (अधिक)30 मार्च 2029, शुक्रवार
चैत्र पूर्णिमा28 अप्रैल 2029, शनिवार
वैशाख पूर्णिमा27 मई 2029, रविवार
ज्येष्ठ पूर्णिमा26 जून 2029, मंगलवार
आषाढ़ पूर्णिमा25 जुलाई 2029, बुधवार
श्रावण पूर्णिमा24 अगस्त 2029, शुक्रवार
भाद्रपद पूर्णिमा22 सितम्बर 2029, शनिवार
आश्विन पूर्णिमा22 अक्टूबर 2029, सोमवार
कार्तिक पूर्णिमा21 नवम्बर 2029, बुधवार
मार्गशीर्ष पूर्णिमा20 दिसम्बर 2029, गुरुवार

पूर्णिमा व्रत की विधि

पूर्णिमा व्रत के दिन प्रात:काल जल्दी उठकर दैनिक क्रिया करके किसी भी पवित्र नदी जलाशय, कुआ, बावड़ी या फिर घर पर ही गंगाजल मिले जल से स्नान करे। और व्रत का संकल्प लेकर भगवान सूर्यदेव को लाल पुष्प डालकर जल का अर्य दे। इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्ण और माता लक्ष्मी जी और भगवान की प्रतिमा स्थापित करके धूप दीप जलाये और उन्हें नेवेद्य, फल- फूल आदि अर्पित करे। और पूर्णिमा के दीन भगवान सत्यनारायण की कथा पढ़े या कथा सुने। इसके बाद माता लक्ष्मी भगवान विष्णु जी की आरती करें। और रात्रि में चंद्रमा को अर्य देकर व्रत का पारण करे। इसके बाद किसी जरुरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन कराकर तिल, गुड़, कंबल और ऊनी वस्त्र आदि का दान करे।

पूर्णिमा व्रत के नियम

पूर्णिमा व्रत के दिन अन्न का सेवन ना करे, बल्कि इस दिन दूध, मौसमी फल, सूखा मेवा आदि खा सकते है।

पूर्णिमा के दिन कच्चे दूध में चांदी का टुकड़ा डालकर चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए।

पूर्णिमा व्रत के दिन चंद्रमा निकलने पर जल और दूध में अक्षत और चंदन मिलाकर अर्घ देना चाहिए।

पूर्णिमा व्रत के उपाय

पूर्णिमा व्रत के दिन एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उसपर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। और धूप, दीप, फूल, पुष्प, पताश, अक्षत, चंदन, और केला, पंचामृत अर्पित करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी अति प्रसन्न होती है। और सभी मनोकामना पूरी करती है।

पूर्णिमा के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा करने के बाद उन्हें बेलपत्र 3, 5, 7 की संख्या में चढ़ाये और भांग, धतूरा, सफेद चंदन, और खीर का भोग लगाने से भगवान शिव और माता पार्वती जल्द प्रसन्न होते है और सभी मनोकामनाएं पूरी करते है।

पूर्णिमा व्रत 2030 की तारीखे

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