Chaitra Amavasya 2030: 2030 में चैत्र अमावस्या कब है, New Delhi, india

Chaitra Amavasya 2030: हिन्दू धर्म मे अमावस्या तिथि का विशेष महत्व बतलाया गया है। जो कि साल में कुल 12 अमावस्या पड़ती है। हिंदी पंचांग के अनुसार हर वर्ष चैत्र माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली अमावस्या को चैत्र अमावस्या कहा जाता हैं। इस दिन भगवान शिव भगवान विष्णु की पूजा आराधना की जाती है। चैत्र अमावस्या के दिन स्नान, दान करने से देवी देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। और इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, तर्पण और तिल आदि का दान करने से सभी प्रकार की मनोकामना पूरी होती है। और चैत्र अमावस्या के दिन भगवान विष्णु के साथ पीपल के पेड़ की पूजा करने से सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है जिससे जीवन में खुशहाली आती है।

हर अमावस्या की तरह ही चैत्र अमावस्या के दिन भी पूर्वजों के पूजन और तर्पण करने का विधान है। चैत्र अमावस्या के दिन अनेको धार्मिक कार्य किये जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि चैत्र अमावस्या के दिन पितरों की मोक्ष प्राप्ति के लिए इस दिन व्रत अवश्य रखना चाहिए। आईये जानते है साल 2030 में चैत्र अमावस्या कब है ? 02 या 03 अप्रैल, जानिए सही दिन तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस दिन किये जाने वाले उपाय

Chaitra Amavasya 2030 Date Time: २०30 में चैत्र अमावस्या कब है, New Delhi, india

व्रत त्यौहारव्रत त्यौहार समय
चैत्र अमावस्या02 अप्रैल 2030, मंगलवार
अमावस्या तिथि प्रारम्भ02 अप्रैल 2030, सुबह 02:10 मिनट पर
अमावस्या तिथि समाप्त03 अप्रैल 2030, सुबह 03:31 मिनट पर

चैत्र अमावस्या पूजा विधि

धार्मिक मान्यता के अनुसार हर माह की अमावस्या तिथि पितरो को समर्पित होती है। इसलिए चैत्र अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर दैनिक क्रिया से निपटकर किसी भी गंगा नदी, कुंड, पोखर या बावड़ी में यआ फिर घर पर ही गंगाजल मिले जल से स्नान करें और तांबे के पात्र में लाल सिंदूर, रोली और लाल फूल मिलाकर भगवान सूर्य देव को अर्घ दे।

अगर आप नदी में स्नान के लिए नहीं जा सकते हैं तो घर में ही स्नान वाले पानी में थोड़ा सा गंगाजल डालकर नहा लें। इसके बाद भगवान सूर्य को तांबा के पात्र में जलभर अर्पित करें । इसके बाद पित्ररो की आत्मा की शांति के लिए दान, तर्पण और श्राद्ध कर्म करे। इसके बाद किसी पीपल के पेड़ में जल का अर्घ दे।

और वही पर सरस्पओ के तेल का एक दीपक जलाएं और पीपल के पेड़ की परिक्रमा करे। इसके बाद शनि मंत्रो का जाप करे या फिर शनि चालीसा का पथ करे। इसके बाद अपने सामर्थ के अनुसार किसी गरीब ब्यक्ति या ब्राम्हण को वस्त्र, अनाज, फल आदि का दान करना चाहिए।

चैत्र अमावस्या क्या करे क्या नही

चैत्र अमावस्या के दिन काल सर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए स्नान ध्यान करके भगवान शिवजी की पूजा की पूजा करे। और बहते हुए जल में तांबे या चादी से बने नाग नागिन की प्रतिमा को प्रवाहित करे काल सर्प दोष से छुटकारा मिलेगा।

चैत्र अमावस्या के दिन नदी, जलाशय या कुंड आदि में स्नान करें और सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद पितरों का तर्पण करें। और पितरों की आत्मा की शांति के लिए उपवास करें और किसी गरीब व्यक्ति या ब्राम्हण को दान-दक्षिणा दें।

चैत्र अमावस्या के पितरो की मोक्ष प्राप्ति के लिए स्नान दान, अन्न दान, गौ दान, स्वर्ण दान और वस्त्र दान आदि करना शुभ माना गया है। इसके अलावा पितरों का श्राद्ध करने के बाद किसी गरीब या ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए।

ऐसी मान्यता है की चैत्र अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक और शनि देव को नीले पुष्प, काले तिल और सरसों का तेल चढ़ाने से आप की सब्बि समस्या समाप्त हो जाती है।

चैत्र अमावस्या के दिन माता लक्ष्मी को प्रसन्न कण्व के लिए और उनकी कृपा पाने के लिए घर पर ही गाय के शुद्ध घी का दिपक जलाना चाहिए।

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