Chaitra Navratri 2030: हिन्दू धर्म में चैत्र मास का विशेष महत्व माना जाता है। क्योंकि यह माह हिंदी पंचांग के अनुसार साल का पहला महीना होता है। इस महीने में ही चैत्र नवरात्रि का पर्व भी मनाया जाता है। इन 9 दिनों में माता दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि के समय में माता दुर्गा धरती लोक पर आती है। और अपने भक्तों की सारी मनोकामना पूरी करती है। हिंदी पंचांग के अनुसार चेैत्र मास की शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैंत्र नवरात्रि प्रारम्भ हो जाती है। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन ही व्रती कलश स्थापना करते है और माता शैत्रपुत्री की पूजा-अर्चना करते हैं। इसके बाद अष्टमी और नवमी तिथि के दिन कन्या पूजन करने के बाद व्रत का पारण करते है। वैसे तो साल में कुल चार नवरात्रि पड़ती है। लेकिन शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व होता है।
साल 2030 में चैत्र नवरात्रि 03 अप्रैल बुधवार से शुरू हो रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रत्येक नवरात्रि पर माता दुर्गा धरती पर अलग-अलग वाहनों (सवारी) से आती हैं। जिसका भी विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस बार माता दुर्गा हाथी पर सवार होकर धरती पर आएगी। ऐसी मान्यता है कि माता रानी का हाथी पर आना शुभ माना जाता है और यह अधिक वर्षा और समृदि का सूवक है। इसलिए चैत्र नवरात्रि पर माता दुर्गा की पूजा अर्चना करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। और माता दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है। अब आइये जानते है साल 2030 में चैत्र नवरात्रि कब से शुरू हो रही है, जानिए सही दिन तारीख, पूजा विधि और दुर्गा मंत्र
2030 चैत्र नवरात्रि कब है? Chaitra Navratri 2030 Date Time New Delhi India
| व्रत त्यौहार समय | व्रत त्यौहर नाम |
|---|---|
| 03 अप्रैल 2030, दिन बुधवार | माँ शैलपुत्री पूजा, घटस्थापना |
| 04 अप्रैल 2030, दिन गुरुवार | माँ ब्रम्हचारणी पूजा |
| 05 अप्रैल 2030, दिन शुक्रवार | माँ चंद्रघंटा पूजा |
| 06 अप्रैल 2030, दिन शनिवार | माँ कुष्मांडा पूजा |
| 07 अप्रैल 2030, दिन रविवार | माँ स्कंदमाता पूजा |
| 08 अप्रैल 2030, दिन सोमवार | माँ कात्यायनी पूजा |
| 09 अप्रैल 2030, दिन मंगलवार | माँ कालरात्रि पूजा |
| 10 अप्रैल 2030, दिन बुधवार | माँ महागौरी पूजा |
| 11 अप्रैल 2030, दिन गुरुवार | माँ सिद्धिदात्री पूजा |
| 12 अप्रैल 2030, दिन शुक्रवार | रामनवमी पूजा |
| 13 अप्रैल 2030, दिन शनिवार | नवरात्रि पारण |
नवरात्रि पूजा विधि
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करके व्रत का संकल्प ले और पूजा स्थल को अच्छे से साफ-सफाई करें और लाल रंग के कपड़े पर माता दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करे। इसके बाद माता दुर्गा को लाल चुनरी, लाल पुष्प से सजाएं। इसके बाद माता दुर्गा की मूर्ति के सामने अखंड ज्योति जलाएं। फिर एक कलश में गंगाजल भरकर उसमें कुछ आम के पत्ते डालें। और कलश के ऊपर नारियल को लाल कपड़े लपेटकर मोली से बांधकर रखदे और इस कलश को मूर्ति के पास रखें। इसके बाद मिट्टी के घड़े में मिट्टी डालकर उसमे जौ के बीज बो दे और इसे पूजा स्थल पर स्थापित करें। फिर माता दुर्गा के समकक्ष धूप जलाएं, शंख बजाएं, और “ऊ ऐं हीं क्लीं चामुंडाये विच्चे” मंत्र का जाप करें। और घंटी बजाकर माता दुर्गा की पूजा करें।
दैनिक पूजा
प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें। धी से भरा हुआ दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें। और नवरात्रि के प्रत्येक दिन माता दुर्गा रूप के लिए विशेष मंत्रों का जाप और मौसमी ताजे फूल, फल, और शुद्ध धी से बनी मिठाइयों को भोग के रूए में अर्पित करें। और पूजा जे अंत में आरती करें और भक्ति गीतों का पाठ करें। इसके बाद नवमी के दिन पूजा का समापन करके कन्या पूजन करे पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करें।
अखंड ज्योति
यदि आप अखंड ज्योत जलाते हैं, तो इसे निरंतर जलते रहना चाहिए। समय-समय पर इसमें घी डालते रहें ताकि यह बुझने न पाए। पुराणों के अनुसार, अखंड ज्योत को घर की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने के उद्देश्य से जलाया जाता है।
नवरात्री पूजा मंत्र
ॐ जयंती मंगला काली भद्र काली कपालिनी । दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते।।
ॐ सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
