Dasha Mata Ki Aarti: हिन्दू धर्म में दशामाता व्रत का विशेष महत्व है। इस दिन दशा माता का व्रत पूजन किया जाता है। हिंदी पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष चैत्र मास की कृष्णपक्ष की दशमी तिथि को Dasha Mata का पर्व मनाया जाता है। इस दिन दशामाता की कथा पढ़ने से दस गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है।
धार्मिक मान्यता है कि आज के दिन Dasha Mata की पूजा करने और कथा पढ़ने से घर में सुख समृद्धि आती है। और परिवार के सदस्यों की ग्रह दशा ठीक रहती है। चैत्र मास की दशमी तिथि के दिन व्रती महिलाएं घर की दशा सुधारने के लिए दशा माता का पूजन करती है। और व्रत रखते हुए पीपल के वृक्ष का पूजन करती है। और दशामाता की कथा को सुनती है।
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इस दिन सभी व्रती महिलाएं मनोकामना पूर्ति के लिए पीपल के वृक्ष में 108 बार कच्चे सूत लपेटती है। इसके बाद कच्चे धागे में 10 गठान लगाकर गले धारण करती है। और Dasha Mata Ki Aarti करती है मान्यता है इससे दुख, दारिद्रय का नाश होता है तथा परिवार में सुख समृद्धि आती है।
दशा माता की आरती Dasha Mata Ki Aarti
आरती श्री दशा माता की !
जय सत-चित्त आनंद दाता की !!
भय भंजनि अरु दशा सुधारिणी !
पाप -ताप-कलि कलुष विदारणी !!
शु्र लोक में सदा विहारणी !
जय पालिनी दिन जनन की !!
आरती श्री दशा माता की !
अखिल विश्व- आनंद विधायिनी !!
मंगलमयी सुमंगल दायिनी !
जय पावन प्रेम प्रदायिनी !!
अमिय-राग-रस रंगरली की !
आरती श्री दशा माता की !!
नित्यानंद भयो आह्लादिनी !
आनद घन आनंद प्रसाधिनी!!
रसमयि रसमय मन- उन्मादिनी !
सरस कमलिनी विष्णुआली की !!
आरती श्री दशा माता की !
