Sankashti Chaturthi 2027 List: संकष्टी चतुर्थी 2027 की तारीखे, New Delhi, India

Sankashti Chaturthi 2027 List: हिन्दू धर्म में संकष्टी चतुर्थी व्रत का विशेष महत्त्व है। हिंदी पंचांग के अनुसार हर माह के कृष्ण पक्ष में संकष्टी चतुर्थी और शुक्ल पक्ष में विनायक संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। मान्यता है की अगर जो संकष्टी चतुर्थी मंगलवार के दिन पड़ती है तो उसे अंगारकी संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है यह तिथि भगवान गणेश को समर्पित होती है। इसीलिए इस दिन व्रत रखकर भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है। संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi) के दिन भगवान गणेश की पूजा अर्चना करने से सभी प्रकार की मनोकामना पूरी होती है। और इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को धन-लाभ, सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। आईये जानते है साल 2027 में संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi) व्रत कब-कब पड़ेगी, जनवरी से दिसंबर तक की सम्पूर्ण दिन व तारीख

Sankashti Chaturthi 2027 List: संकष्टी चतुर्थी 2027 की तारीखे, New Delhi, India

व्रत त्यौहारव्रत त्यौहार समय
लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी25 जनवरी 2027, दिन सोमवार
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी24 फरवरी 2027, दिन बुधवार
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी25 मार्च २०27, दिन गुरुवार
विकट संकष्टी चतुर्थी24 अप्रैल 2027, दिन रविवार
एकदंत संकष्टी चतुर्थी23 मई 2027, दिन रविवार
कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी22 जून 2027, दिन मंगलवार
गजानन संकष्टी चतुर्थी22 जुलाई 2027, दिन गुरुवार
हेरम्भ संकष्टी चतुर्थी20 अगस्त 2027, दिन शुक्रवार
विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी19 सितम्बर 2027, दिन रविवार
व्रततुंड संकष्टी चतुर्थी18 अक्तूबर 2027, दिन सोमवार
गणाधिप संकष्टी चतुर्थी17 नवम्बर 2027, दिन बुधवार
अखुरथ संकष्टी चतुर्थी16 दिसम्बर 2027, दिन गुरुवार

संकष्टी चतुर्थी व्रत पूजा विधि

संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi) व्रत के दिन व्रती को शुभ मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करके लाल वस्त्र धारण करे। और व्रत का संकल्प ले। और पूजा स्थल को अच्छे से साफ सफाई करने के बाद पूजा घर को गंगा जल से छिड़काव करें। इसके बाद एक लकड़ी की चौकी पर पीले या लाल रंग व्रत विछाकर भगवान गणेश जी प्रतिमा या फ़ोटो स्थापित करे। इसके बाद घी का दीपक जलाएं, इसके बाद भगवान गणेश जी को तिल, गुड, लड्डू, पुष्प माला अर्पित करे। और प्रसाद के रूप में केला और नारियल अर्पित करे इसके बाद 108 दूर्वा की गांठे और सिन्दूर, अच्छत और लडडू, फल आदि का भोग लगाएं। इसके बाद भगवान गणेश का ध्यान करते हुए आरती करें और संकष्टी चतुर्थी व्रत की कथा पड़े या सुने। इसके बाद भगवान जी के मंत्रो का जाप करे।

गजाननं भूत गणादि सेवितं, कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम्।
उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्।।

और शाम के समय चाँद निकलने पर चन्द्रमा का दर्शन करने के बाद ही अपना व्रत का पारण करना चाहिए और अंत में फल, फूल, मूंगफली, खीर, दूध, दही, या साबूदाने की खिचड़ी बनाकर खाना चाहिए।

संकष्टी चतुर्थी 2028 की तारीखे

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