AAhoi Ashtami 2030: अहोई अष्टमी हिंदी पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। यह व्रत करवा चौथ व्रत के ठीक 4 दिन बाद पड़ती है। करवा चौथ पर महिलााएं पति की दीर्घायु की कामना के लिए व्रत करती हैं। तो वही अहोई अष्टमी पर माताएं अपने संतान की दीर्घायु होने की कामना करती है। और पूरे दिन निर्जला व्रत रखती है। और रात्रि में तारो को अर्घ देने के बाद व्रत का पारण करती है। और फिर जल ग्रहण करती है।
यह व्रत अहोई माता को समर्पित होता है। इस व्रत में अहोई माता के साथ भगवान शिव, माता पार्वती की पूजा करती है। तो कुछ महिलाएं बिना जल ग्रहण किए इस व्रत का उपवास रखती हैं। और फिर तारे देखने के बाद ही उपवास तोड़ती है। आइये जानते है साल 2030 में (Ahoi Ashtami) कब है ? 19 या 20 अक्तूबर, जानिए पूजा शुभ मुहूर्त, पूजा विधि व व्रत का महत्व–
2030 में अहोई अष्टमी कब है: Ahoi Ashtami 2030 Date And Time New Delhi India
| व्रत त्यौहार | व्रत त्यौहार समय |
|---|---|
| अहोई अष्टमी | 19 अक्तूबर 2030, दिन शनिवार |
| पूजा का शुभ मुहूर्त | शाम 05:48 से शाम 07:04 मिनट |
| पूजा की अवधि | 01 घंटा 17 मिनट |
| तारे देखने का समय | शाम 06:12 मिनट पर |
| चंद्रोदय होने का समय | रात 11:53 मिनट पर |
| अष्टमी तिथि प्रारम्भ | 19 अक्टूबर 2०30, सुबह 07:11 मिनट तक |
| अष्टमी तिथि समाप्त | 20 अक्टूबर 2030, सुबह 09:18 मिनट तक |
अहोई अष्टमी की पूजा विधि
अहोई अष्टमी व्रत के दिन प्रातः काल उठकर नित्यक्रिया से निवृत होकर स्नान आदि करले। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके धुप-दीप जलाएं,और अहोई माता का स्मरण करते हुए पूजा का संकल्प लें। और पूरे दिन निर्जला व्रत रहे। और सूर्यास्त के बाद तारे निकलने पर पूजन शुरू करें। पूजन शुरू करने से पहले पूजा स्थल को साफ करके माता अहोई चौकी की स्थापना करें। इसके बाद माता की चौकी को गंगाजल से पवित्र करें। और उस चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर माता अहोई की प्रतिमा स्थापित करें। फिर कलश की स्थापना करें।
इसके बाद अहोई माता के चरणों में मोती की माला या अपने सामर्थ्य के अनुसार फूल माला भी रख सकते है। इसके बाद माता का आचमन करके, चौकी पर धुप-दीप जलाएं। और इसके बाद अहोई माता को रोली, अक्षत, दूध और भात अर्पित करें। इसके बाद कथा पढ़े। कथा पूरी होने पर, हाथ में लिए गेहूं के दाने और पुष्प माता के चरणों में अर्पण करे। इसके बाद मोती की माला को गले में पहन लें। इसके पश्चात् माता अहोई की आरती करें। इसके बाद तारो को अर्घ देकर हल्दी, कुमकुम, अक्षत, पुष्प के द्वारा पूजा करें। इसके बाद जल ग्रहण करके अपने व्रत का पारण करें फिर भोजन ग्रहण करें।
अहोई अष्टमी व्रत के नियम
- अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami) के दिन अहोई माता के भोग के लिए गुलगुले जरूर बनाए, क्योंकि यह भोग अहोई माता का प्रिय है। मान्यता है कि गुलगुले अर्पित करने से पूजा सफल होती है और संतान को जीवन में सफलता प्राप्त होती है।
- अहोई अष्टमी के दिन जो महिलाएं व्रत रखी है उन महिलाएं को चमकदार कपङे नही पहनना चाहिए हो सके तो हल्के रंग का कपड़ा पहनना चाहिए।
- अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami) व्रत के दिन हो सके तो व्रत महिलाये दान पुण्य जरूर करे तभी व्रत सफल माना जायेगा।
- अहोई अष्टमी व्रत के दिन व्रती महिलाओं को मिट्टी से जुड़े कोई भी कार्य नही करना चाहिए।
- अहोई अष्टमी के दिन व्रत महिलाओं को दिन में नही सोना चाहिए और नाही इस दिन मन मे किसी के प्रति गंदे विचार नही लाना चाहिए।
अहोई अष्टमी के दिन क्या करे क्या नही
- धार्मिक मान्यता के अनुसार अहोई अष्टमी व्रत के दिन व्रती महिलाओं को कोई भी नुकीली या धार दार वस्तुओं का प्रयोग नही करना चाहिए। और नाही अहोई अष्टमी के दिन मिट्टी की खुदाई भूलकर भी ना करे। ऐसी मान्यता है कि अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami) के दिन व्रती महिलाओ को काला, नीला रंग की साड़ी भूलकर भी नही पहननी चाहिए।
- ऐसी मान्यता है कि अहोई अष्टमी के दिन व्रती महिलाएं खान-पान का विशेष ध्यान रखें और हो सके तो तामसिक भोजन जैसे मांस, मछली, लहसून प्याज आदि से दूर रहे। और हो सके तो इस दिन खाने में सात्विक चीजो का ही प्रयोग करे।
