2027 में बलराम जयंती कब है: Balram Jayanti 2027 Date And time New Delhi India

Balram Jayanti 2027: हिन्दू धर्म मे बलराम जयंती पर्व का विशेष महत्व होता है। हिंदी पंचांग के अनुसार हर साल भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को बलराम जयंती मनाई जाती है। और बलराम जयंती को हलषष्ठी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। बलराम जयंती के दिन महिलाएं संतान की दिर्घायु और कुशलता की कामना के लिए महिलाएं यह व्रत रखती हैं। इस दिन भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था।

ऐसी मान्यता है कि बलरामजी का प्रधान शस्त्र हल तथा मूसल है इसलिए उन्हें हलधर भी कहा जाता है। इसे बलराम जन्मोत्सव, चंद्र षष्ठी, या ललई छठ के रुप में भी मनाया जाता है। हलषष्ठी व्रत में महिलायें अपने पुत्र व संतान की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं।

धार्मिक मान्यता हे कि इस व्रत के प्रभाव से भगवान बलराम जी व्रती महिला को संतान की दिर्घायु प्रदान करते है। और उन्हें सुख समृद्धि का वरदान देते है। इसके साथ इस दिन बलराम जन्मोत्सव होने के कारण खेती में उपयोग होने वाले उपकरणों की पूजा भी की जाती है। आइये जानते है साल 2027 में (Balram Jayanti) कब है? 05 या 06 सितम्बर, जाने सही दिन व तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस दिन क्या खाए क्या नही और इसके अलावा इस दिन क्या करें और क्या ना करें-

2027 में बलराम जयंती कब है: Balram Jayanti 2027 Date And time New Delhi India

व्रत त्यौहारव्रत त्यौहार समय
बलराम जयंती06 सितम्बर 2027, दिन सोमवार
षष्ठी तिथि प्रारम्भ05 सितम्बर 2027, सुबह 11:१७ मिनट पर
षष्ठी तिथि समाप्त06 सितम्बर 2027, सुबह 10:५७ मिनट पर
पूजा का शुभ मुहूर्तसुबह 11:04 से दोपहर 01:35 मिनट तक
पूजा की कुल अवधि02 घंटे 31 मिनट

बलराम जयंती पूजन विधि

Balram Jayanti (हलषष्ठी) व्रत के दिन सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प ले और पूजा-अर्चना के बाद पूरे दिन निराहार रहकर व्रत करना चाहिए। और शाम के समय पूजा-आरती के बाद फलाहार किया जाता है। और बलराम जयंती के दिन घर या बाहर कहीं भी दीवार पर भैस के गोबर से छठ माता का चित्र बनाकर भगवान गणेश और माता पार्वती की पूजा करना चाहिए। इसके बाद घर में ही गोबर से प्रतीक रूप में तालाब बनाकर, उसमें झरबेरी, पलाश और कांसी के पेड़ लगा ले और वहां पर बैठकर पूजा के बाद हलषष्ठी व्रत की कथा सुननी चाहिए।

बलराम जयंती व्रत के नियम

प्रत्येक व्रत की तरह इस व्रत के भी कुछ नियम है जिनका पालन व्रती महिला को अवश्य करना चाहिये। हलषष्ठी के दिन माताओं को महुआ की दातुन करने और महुआ खाने की विशेष परंपरा है। इस दिन व्रत के दौरान अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसी मान्यता है की Balram Jayanti (हलषष्ठी) के व्रत में हल की पूजा की जाती है। इसीलिए हल से जुती हुई अनाज और सब्जियों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

बल्कि इस व्रत में वही चीजें खाई जाती हैं जो तालाब में पैदा होती हैं। जेसे तिन्नी का चावल, केमुआ का साग, पसही के चावल आदि। इसके अलावा इस व्रत में गाय के किसी भी उत्पाद जेैसे दूध, दही, गोबर आदि का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। बल्कि हलषष्ठी व्रत में भैस का दूध, दही आदि का प्रयोग किया जाता है।

बलराम जयंती के दिन क्या खाएं

  • बलराम जयंती के दिन भूलकर भी हल से जोतकर उगाया गया अन्न नही खाना चाहिए।
  • बलराम जयंती के दिन गाय का दूध, दही, और गाय के दूध से बनी हुई कोई चीज नही खानी चाहिए।
  • और नाही इस सभी वस्तुओं का भोग लगाये।

2028 में बलराम जयंती कब है

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