Tulasi Vivah 2028: तुलसी विवाह एक पारंपरिक हिंदू अनुष्ठान है। जिसमें तुलसी के पौधे का विवाह भगवान विष्णु के अवतार शालिग्राम से किया जाता है। यह अनुष्ठान कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। जिसे देवप्रबोधिनी, देवउठनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन तुलसी और भगवान विष्णु स्वरूप शालीग्राम का विवाह किया जाता है।
ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार माह की लंबी निद्रा के बाद जागते हैं और इसके साथ ही सारे शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, आदि खुल जाते हैं। और देवउठनी एकादशी के दिन से ही चतुर्मास की समाप्ति भी होती है. इसके बाद तुलसी-और शालिग्राम का विवाह संपन्न किया जाता है। तुलसी विवाह मथुरा, वृन्दावन, वरसाना आदि क्षेत्रो में विवाह के शुभ अवसरों पर घर और मंदिरों को हिन्दू रीती रिवाज की भाति तुलसी विवाह का आयोजn भी किया जाता है।
इसके अलावा आज के दिन भक्तगण पूर्ण दिवस उपवास का पालन करते हैं तथा शाम के समय विवाह-समारोह का आयोजन करते हैं। और कृष्ण मंदिर में बड़ी ही धूमधाम से तुलसी विवाह मनाया जाता है। कृष्ण मन्दिरों में माता तुलसी के साथ ठाकुर जी की झाँकी बनायी जाती हैं। तथा भव्य उत्सव का आयोजन भी किया जाता है। किसी वास्तविक विवाह के समान ही हल्दी, मेहन्दी, जयमाला, फेरे एवं बारात आदि विवाह सम्बन्धी समस्त परम्पराओं का पालन भी पुरे रीती रिवाज के साथ किया जाता है।
शास्त्रों के अनुसार तुलसी-और शालिग्राम का विवाह कराने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। और दांपत्य जीवन में प्रेम बना रहता है। और पूरे विधि विधान के साथ तुलसी विवाह संपन्न कराने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु की कृपा से उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। और भगवान विष्णु की कृपा उसपर सदा बनी रहती है। अब आइए जानते है साल 2028 में तुलसी विवाह (Tulasi Vivah) कब है 29 या 30 अक्तूबर, जानिए पूजा की तिथि, पूजा विधि और इस दिन किये जाने वाले उपाय व नियम
2028 में तुलसी विवाह कब है: Tulasi Vivah 2028 Date And Time New Delhi India
| व्रत त्यौहार | व्रत त्यौहार समय |
|---|---|
| तुलसी विवाह | 29 अक्तूबर 2028, दिन रविवार |
| द्वादशी तिथि प्रारम्भ | 29 अक्तूबर 2028, सुबह 06:20 मिनट पर |
| द्वादशी तिथि समाप्त | 30 अक्तूबर 2028, सुबह 08:५० मिनट पर |
तुलसी विवाह पूजा विधि
तुलसी विवाह करने से पहले स्नान आदि करने के बाद एक चौकी पर तुलसी का पौधा, और दूसरी चौकी पर शालिग्राम को स्थापित करें। और इनके बगल में एक जल से भरा कलश रखें। और उसके ऊपर आम के पांच पत्ते रखें। और तुलसी के गमले में गेरू लगाकर घी का दीपक जलाएं। इसके बाद तुलसी और शालिग्राम पर गंगाजल का छिड़काव करें। और रोली, चंदन का टीका लगाएं।
और तुलसी के गमले में ही गन्ने से मंडप बनाएं। इसके बाद तुलसी को सुहाग का प्रतीक मानकर उनपर लाल चुनरी ओढ़ाए। और गमले में साड़ी लपेट कर, चूड़ी चढ़ाएं। और उनका दुल्हन की तरह श्रृंगार करें। इसके बाद शालिग्राम को चौकी समेत हाथ में लेकर तुलसी की सात बार परिक्रमा करे। इसके बाद आरती करें। और तुलसी विवाह संपन्न होने के बाद सभी लोगों को प्रसाद बाटकर पूजा संपन्न करें।
तुलसी विवाह पर करें ये उपाय
- तुलसी विवाह के दिन भगवान शालिग्राम और माता तुलसी की विधि विधान से पूजा करने से वैवाहिक जीवन से कड़वाहट दूर होती है और सुख- शांति बनी रहती है.
- तुलसी विवाह (Tulasi Vivah) के दिन माता तुल़सी को सौलाह श्रृंगार चढ़ाना चाहिए. ऐसा करने से अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है।
- तुलसी विवाह के दिन शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जालने से घर से दरिद्रता दूर होती है और सुख- समृद्धि का वास होता है।
- तुलसी विवाह के दिन तुलसी के पौधे की सात बार परिक्रमा करने और गोधूली बेला में घी का दीपक जलाने से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
