Indira Ekadashi 2027: हिन्दू धर्म मे एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है। हिंदी पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष आश्विन मास के कृष्णपक्ष की एकादशी तिथि को इंदिरा एकादशी व्रत के नाम से जाना जाता है। इंदिरा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने का विधान है। हिंदी पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष में आने के कारण इसे पितृ एकादशी भी कहते है। इसी दिन एकादशी तिथि का श्राद्ध भी किया जाता है। इंदिरा एकादशी के दिन भगवान विष्णु स्वरूप शालिग्राम की पूजा करने से बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है। और लगातार सात पीढ़ियों तक के पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
ऐसी मान्यता है इस दिन इंदिरा एकादशी का व्रत पूजा करने से पितरो की आत्मा को शांति मिलती है। मान्यता है कि इंदिरा एकादशी (Indira Ekadashi) का व्रत को करने से व्रती को हजारों वर्षों की तपस्या करने जितना शुभ फल प्राप्त होता है। साथ ही इस व्रत को करने से कन्यादान और पुण्य की प्राप्ति होती है। इसके अलावा भगवान ।विष्णु की पूजा-अर्चना करने से सात पीढ़ियों के पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइये जानते है साल 2027 में इंदिरा एकादशी कब है? 25 या 26 सितम्बर, जानिए सही दिन व तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत पारण व इस दिन किये जाने वाला उपाय –
2027 में इंदिरा एकादशी व्रत कब है: Indira Ekadashi 2027 Date And Time New Delhi India
| व्रत त्यौहार | व्रत त्यौहार समय |
|---|---|
| इंदिरा एकादशी व्रत | 26 सितम्बर 2027, दिन रविवार |
| एकादशी तिथि प्रारम्भ होगी | 25 सितम्बर 2027, रात 10:30 मिनट पर |
| एकादशी तिथि समाप्त होगी | 26 सितम्बर 2027, शाम 07:49 मिनट पर |
| एकादशी व्रत पारण का समय | 27 सितम्बर 2027, सुबह 06:12 सुबह 06:38 मिनट तक |
इंदिरा एकादशी पूजा विधि
इंदिरा एकादशी व्रत के दिन व्रती को शुभ मुहूर्त में उठकर दैनिक क्रिया करके स्नान आदि करके साफ-शुद्ध कपड़े पहनकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर के मंदिर या पूजा स्थल की अच्छे से साफ-सफाई करके गंगाजल का छिड़काव करें। फिर एक लकड़ी की चौकी पर पिला कपड़ा विछाकर उसपर भगवान विष्णुजी की मूर्ति या फ़ोटो स्थापित करे। इसके बाद भगवान विष्णु जी को जल अर्पित करे इसके बाद भगवान विष्णु को पिला वस्त्र, पिला चंदन, पिला पुष्प आदि अर्पित करें। फिर भगवान विष्णु के समक्ष घी का दीपक जलाएं।
इसके बाद इंदिरा एकादशी (Indira Ekadashi) व्रत की कथा सेने या फिर पढ़े। इसके बाद भगवान भगवान विष्णुसहस्त्र नाम का पाठ पढ़े या फिर सुने। ततपश्चात भगवान विष्णु को भोग लगाएं और आरती करें। इसके बाद रात्रि जागरण करते हुए भजन कीर्तन करे। और अगले दिन शुभ मुहूर्त में उठकर द्वादशी तिथि के दिन व्रत का पारण करे। इसके अलावा इंदिरा एकादशी के दिन किसी भी जरूरत मंद व्यक्ति या गरीब ब्राह्मण को दान दक्षिणा देकर व्रत का पारण करे।
इंदिरा एकादशी व्रत के उपाय
- हिंदी पंचांग के अनुसार इंदिरा एकादशी पितृ पक्ष में पड़ती है। इसलिये दिन सच्चे मन से व्रत रखकर पितरों के नाम का दान, तर्पण और ब्राह्मण भोज कराएं और शाम के समय दक्षिण दिशा में एक दीपक जलाएं। इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और पितृ दोष भी दूर होता है। इंदिरा एकादशी (Indira Ekadashi) के दिन व्रत रखकर सुबह- शाम तुलसी की माला से ‘ऊ नमो भगवते वासुदवाय नमः मंत्र का जप करें।
- पितृ पक्ष की इंदिरा एकादशी के दिन शालिग्राम भगवान की पूजा करने के बाद पांच लोगों के लिए भोजन जरूर निकाले जैसे – पहला गाय, दूसरा कौवा, तीसरा कुत्ता, चौथा बिल्ली और पांचवां किसी भी जरूरतमंद को।इसके साथ ही इंदिरा एकादशी के दिन चीटियों को आटा खिलाने से भी पितर प्रसन्न रहते हैं।
- इंदिरा एकादशी के दिन पीपल के पेड़ में गाय का कच्चा दूध चढ़ाकर सरसो के तेल का दीपक जलाने से पितरो की आत्मा को शांति मिलती है और पितर अति प्रसन्न होते है। और अपने लोग को जाते समय अपने पौत्र, पुत्रो को अपना आशीर्वाद देकर जाते है।
2028 में इंदिरा एकादशी कब है
