Vijaya Ekadashi 2027: हिन्दू धर्म मे एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। हिंदी पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की एकादशी तिथि को विजया एकादशी का पर्व मनाया जाता है। विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा आराधना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि विजया एकादशी के दिन किसी भी कार्य को करने से सफलता प्राप्त होती है। और विजया एकादशी का व्रत करने से शत्रुओं पर सदा विजय प्राप्ति होती है। और सभी कार्य अपने अनुसार होने लगते हैं।
विजया एकादशी का व्रत करने से स्वर्ण दान,भूमि दान,अन्न दान और गौ दान से भी अधिक पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा विजया एकादशी का व्रत करने से व्रती को वाजपेय यज्ञ का फल प्राप्त होता है। आईये जानते है साल 2027 में विजया एकादशी (Vijaya Ekadashi) कब है? 03 या 04 मार्च, जानिए पूजा की सही तिथि, पूजा का शुभ, पूजा विधि, व्रत पारण और इस दिन किये जाने वाले उपाय
2027 में विजया एकादशी व्रत कब है: Vijaya Ekadashi 2027 Date And Time New Delhi India
| व्रत त्यौहार | व्रत त्यौहार समय |
|---|---|
| विजया एकादशी व्रत | 04 मार्च 2027, दिन गुरुवार |
| एकादशी तिथि प्रारम्भ होगी | 03 मार्च 2027, सुबह 04:44 मिनट पर |
| एकादशी तिथि समाप्त होगी | 04 मार्च 2027, सुबह 04:24 मिनट पर |
| एकादशी व्रत पारण का समय | 05 मार्च 2027, सुबह 06:42 से सुबह 09:03 मिनट पर |
विजया एकादशी पूजा विधि
विजया एकादशी व्रत के दिन व्रती ब्रम्ह मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करके शुद्ध वस्त्र धारण करे और एकादशी व्रत का संकल्प ले। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करे, और भगवान विष्णु जी को पिला, वस्त्र, पिला, पुष्प, फल, रोली, चंदन, नैवेद्य आदि अर्पित करे। इसके बाद विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ करे। इसके बाद विजया एकादशी व्रत की कथा सुनी या फिर पढ़े।
इसके बाद भगवान विष्णु जी को भोग लगाए और भगवान विष्णु की आरती करें। और हो सके तो पूरा दिन निर्जला व्रत रखें यदि किसी कारण वश ऐसा करना सम्भव नही है तो फलाहार का सेवन कर सकते है। और रात्रि में भजन कीर्तन करते हुए रात्रि जागरण करे। और द्वादशी तिथि के दिन शुभ मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करके व्रत का पारण करे।
विजया एकादशी उपाय
- धार्मिक मान्यता के अनुसार विजया एकदशी के दिन कुछ जरूरी उपाय करने से सुख-समृद्धी और नौकरी से जुड़ी हर मनोकमनाएं होगी पूरी होगी लेकिन इस बात का विशेष ध्यान रखे की एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान नहीं करना चाहिए।
- विजया एकादशी (Vijaya Ekadashi) के दिन पूजा में तुलसी के पत्तों का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान विष्णु अति सीघ्र प्रसन्न होते हैं। इसलिए एकादशी की पूजा करते समय भगवान विष्णु को तुलसी पत्र चढ़ाते समय भगवान के सामने अपने परिवार में सुख-समृद्धि की कामना करनी चाहिए।
- विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णुजी के साथ भगवान गणेशजी की भी पूजा करें इससे सौभाग्य में वृद्धि होती है। विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करके उनकी धूम, दीप, पुष्प, चंदन, फूल, तुलसी आदि से उनकी पूजा करे। जिससे कि समस्त दोषों का नाश हो सके और आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो सकें।
- विजया एकादशी के दिन शाम को तुलसी के पास गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाकर तुलसी नामाष्टक का पाठ करने से जीवन में शुभता बढ़ती है। विजया एकादशी (Vijaya Ekadashi) के दिन केले के समीप दीपक जलाने से विवाह सम्बंधित परेशानी दूर होती है।
- विजया एकादशी के दिन कलश में आम के पत्ते रखकर इस पर जौ से भरा पात्र रखें। इसके बाद भगवान विष्णु के सामने धी का एक दीपक जलाएं और 11 लाल फूल, 11 फल और मिठाई चढ़ाएं। इसके बाद विष्णु जी और माता लक्ष्मी की पूजा करें। ऐसा करने से जल्द ही मनचाही नौकरी के योग बनते है।
- विजया एकादशी के दिन शाम के समय तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाकर तुलसी की 11 बार परिक्रमा करे। विजया एकादशी (Vijaya Ekadashi) के दिन भगवान विष्णु जी का पंचामृत से अभिषेक करें ऐसा करने से जीवन मे आ रही मुश्किलें दूर होती है।
