Jaya Ekadashi 2030: हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। हिंदी पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष माघ मास के शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि को पढ़ने वाली एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन एकादशी का व्रत करने से नीच योनि जैसे भूत, प्रेत, पिचास जैसी योनि मुक्ति मिलती है। और जीवन मे सुख समृद्धि आती है। इस दिन भगवान विष्णु जी के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है। मान्यता है कि यदि जो लोग जया एकादशी के दिन व्रत उपवास रखते हुए पूजा पाठ करते है उनको सीधे वैकुंठ की प्राप्ति होती है और मोक्छ कि प्राप्ति होती है।
ऐसी मान्यता है कि जया एकादशी के दिन भगवान विष्णु के पूजन में पुष्प, अक्षत, रोली, धूप, दीप आदि अर्पित करना चाहिए। क्योकि ऐसा करने से जया एकादशी व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। आइये जानते है इस साल जनवरी 2030 में जया एकादशी व्रत कब है? 13 या 14 फरवरी, जानिए सही दिन व तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस दिन किये जाने वाले उपाय –
2030 में जया एकादशी व्रत कब है: Jaya Ekadashi 2030 Date Time New Delhi India
| व्रत त्यौहार | व्रत त्यौहार समय |
|---|---|
| जया एकादशी व्रत | 14 फरवरी २०३०, दिन गुरुवार |
| एकादशी तिथि प्रारम्भ होगी | 13 फरवरी २०३0, सुबह 11:१७ मिनट पर |
| एकादशी तिथि समाप्त होगी | 14 फरवरी 2030, दोपहर 12:49 मिनट पर |
| एकादशी व्रत पारण का समय | 15 फरवरी २०३०, सुबह 07:०० से सुबह 09:14 मिनट पर |
जया एकादशी व्रत पूजा विधि
जया एकादशी (Jaya Ekadashi) व्रत से एक दिन पूर्व दशमी तिथि के दिन एक ही समय सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए। और व्रती को ब्रमचर्य का पालन करना चाहिए। और व्रत वाले दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प ले। इसके बाद धूप, दिप, फल, और पंचामृत आदि अर्पित करके भगवान विष्णु के श्रीकृष्ण अवतार की पूजा करनी चाहिए और रात्रि में जागरण करते हुए। श्री हरि के नाम का भजन, कीर्तन करना चाहिए। और द्वादशी के दिन किसी भी जरूरत मन्द ब्यक्ति या ब्राम्हड़ को भोजन कराकर दान दक्षिणा देकर व्रत का पारण करना चाहिए।
जया एकादशी व्रत उपाय
धार्मिक मान्यता है कि जया एकादशी का व्रत रखने से मनुष्य के सभी कार्य सफल होते हैं और भगवान विष्णु की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति जया एकादशी के दिन तुलसी का ये उपाय करता है तो भगबान विष्णु उसकी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करते हैं।
- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि कोई भी व्यक्ति तंगी से छुटकारा पाना चाहता है तो जया एकादशी (Jaya Ekadashi) व्रत के दिन एक तांबे के लोटे में चीनी मिलाकर पीपल पेड़ को चढ़ाने से तंगी दूर होती है। क्योकी भगवान विष्णु जी का पीपल में वास होता है।
- धार्मिक मान्यता है कि जया एकादशी के दिन तुलसी का पौधा लगाना बहुत ही शुभ माना जाता है। यही कारण है कि भगवान विष्णु जी को तुलसी दल अति प्रिय है।
- ऐसी मान्यता है कि जया एकादशी के दिन अपने घर की पूर्व दिशा में तुतसी का पौधा लगाना चाहिए। फिर जया एकादशी व्रत के अगले दिन सुबह तुलसी के पौधे की धूप, दीप, अगरवती, फल-फूल, नवैद आदि अर्पित करके उनकी पूजा करें।
- इसके बाद तुलसी मंत्र का उच्चारण करे और जल अर्पित करें। और जल अर्पित करने के बाद तुलसी के पौधे की 11 बार परिक्रमा करे। इसके बाद तुलसी जी की आरती करे और फिर शाम को तुलसी के पास जाकर दीपक जलाकर ॐ भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जाप करे।
जया एकादशी के दिन क्या न करे
- धार्मिक मान्यता के अनुसार जया एकादशी व्रत के दिन चावल का सेवन भुलकर भी नही करना चाहिए क्योकि जो लोग एकादशी व्रत के दिन चावल का सेवन करते है। उनका रेंगने वाले जीव योनि में जन्म मिलता है।
- ऐसी मान्यता है कि जया एकादशी व्रत के दिन भुलकर भी तामसिक चीजो का सेवन नही करना चाहिए। जैसे मांस, मछली, अंडा, लहसुन प्याज आदि
जया एकादशी व्रत में क्या खाना चाहिए
जया एकादशी (Jaya Ekadashi) व्रत में खानपान के नियमों का पालन करना बहुत जरूरी होता है। क्योकि एकादशी व्रत में नियम के साथ पूजा पाठ नही करने से व्रत सफल नही माना जाता है जैसे-
- जया एकादशी (Jaya Ekadashi) व्रत में शकरकंद, कुट्टू के आटे से बनी रोटी खा सकते हैं। दूध, दही और फल भी खा सकते हैं। भगवान विष्णु को पंचामृत का भोग लगाएं। फिर उसे प्रसाद रूप में ग्रहण करें। इस व्रत में बाहर की बनी मिठाइयों का प्रयोग न करें और न ही बाहर की बनी चीजें खाएं।
- शास्त्रो के अनुसार एकादशी व्रत में तामसिक चीजो का सेवन नही करना चाहिए जैसे- मांस, मछली, अंडा, लहसुन, प्याज, वैगन, मूली आदि।
